विदर्भ में साढ़े 12 हजार युवा बने उद्यमी, 45 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार
मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती योजना बनी युवाओं की ताकत

* 280 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण और 75 करोड़ रुपये की सब्सिडी से बदली हजारों परिवारों की तस्वीर
नागपुर/दि.14 – नौकरी नहीं मिल रही और पढ़ाई पूरी होने के बाद आगे क्या? जैसे सवालों से जूझ रहे विदर्भ के हजारों युवाओं के लिए मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती कार्यक्रम (सीएमईजीपी) नई उम्मीद बनकर सामने आया है. उद्योग विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत विदर्भ के 11 जिलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 12 हजार 500 से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके माध्यम से 45 हजार से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है. योजना के तहत बैंकों द्वारा मंजूर किए गए ऋण और राज्य सरकार की ओर से प्रदान की गई सब्सिडी ने युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से नौकरी देने वाला बनाने का काम किया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के माध्यम से बैंकों ने 280 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत किया है, जबकि सरकार ने लाभार्थियों के खातों में 75 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे जमा की है.
* रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बने युवा
मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है. योजना के तहत उद्योग शुरू करने के लिए 50 लाख रुपये तक तथा सेवा क्षेत्र के व्यवसायों के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है. इसके साथ ही परियोजना की श्रेणी के अनुसार 15 से 35 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जाती है. इस आर्थिक सहायता ने हजारों युवाओं को किराना दुकान, ऑटो सर्विस सेंटर, कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, वस्त्र निर्माण, लॉजिस्टिक्स और आईटी सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया है.
* कृषि आधारित उद्योगों में सबसे अधिक रोजगार
विदर्भ की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को देखते हुए युवाओं ने सबसे अधिक रुचि कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में दिखाई है. योजना के तहत 4,800 कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हुईं. इन इकाइयों के माध्यम से 18,500 लोगों को रोजगार मिला. संतरा, कपास, सोयाबीन, दाल और अन्य कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों को विशेष बढ़ावा मिला. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार मिलने के साथ-साथ कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन भी संभव हुआ है.
* उत्पादन क्षेत्र ने भी दिखाई मजबूती
योजना के तहत 3,900 उत्पादन इकाइयां स्थापित की गईं. इनमें गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, प्लास्टिक उत्पाद, धातु निर्माण, सीमेंट आधारित लघु उद्योग और अन्य विनिर्माण इकाइयां शामिल हैं. इन उद्योगों के माध्यम से करीब 14 हजार युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है. इससे ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिली है.
* सेवा क्षेत्र में बढ़ा स्वरोजगार
सेवा क्षेत्र में भी युवाओं ने बड़ी संख्या में निवेश किया है. योजना के तहत 3,800 सेवा क्षेत्र की इकाइयां स्थापित हुईं. इनसे 12,500 लोगों को रोजगार मिला. ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर, कंप्यूटर और आईटी सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड स्टोरेज, रिपेयरिंग सेंटर तथा अन्य सेवा आधारित व्यवसायों ने ग्रामीण और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं.
* गांवों में बढ़े उद्योग, कम हुआ पलायन
योजना का एक बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों से महानगरों की ओर होने वाले पलायन में कमी के रूप में देखा जा रहा है. पहले रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा नागपुर, पुणे, मुंबई और अन्य शहरों का रुख करते थे, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित होने से उन्हें अपने ही जिले और गांव के आसपास रोजगार उपलब्ध हो रहा है. विशेष रूप से नागपुर, अमरावती, यवतमाल और वर्धा जिलों में कपास, संतरा और दाल प्रसंस्करण से जुड़े लघु उद्योगों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है.
* आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता विदर्भ
उद्योग विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती कार्यक्रम केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का अभियान है. सब्सिडी और आसान ऋण सुविधा के कारण ऐसे कई युवा भी व्यवसाय शुरू कर पाए, जिनके पास पूंजी की कमी थी.
विदर्भ में स्थापित 12,500 से अधिक नए उद्योगों ने यह साबित कर दिया है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और अवसर मिले तो वे न केवल अपना भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार का सृजन कर सकते हैं. योजना की सफलता को देखते हुए आने वाले वर्षों में और अधिक युवाओं को इससे जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि विदर्भ में उद्यमिता आधारित विकास को और गति मिल सके.





