अमरावती की उमरडा गाय को देशी गोवंश के रूप में मान्यता

आईसीएआर ब्रीड रजिस्टे्रशन कमेटी की 14 वीं बैठक में मिली मंजूरी

मुंबई/दि.21 – राज्य के अमरावती की प्रसिध्द उमरडा गाय को स्वतंत्र देशी गोवंश के रूप में मान्यता मिली है. वहीं, सांगली के माडग्याल प्रजाति के भेड को भी स्वतंत्र व अधिकृत प्रजाति पशुसंवर्धन विभाग की ओर से हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो संस्था को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था.
भारतीय कृषि संशोधन परिषद (आईसीएआर) ब्रीड रजिस्टे्रशन कमेटी की 14 वीं बैठक में यह मंजूरी प्रदान की गई है. राज्य के पशुसंवर्धन विभाग के सचिव डॉ. रामास्वामी एन. ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने से उमरडा गाय और माडग्याल भेड के जतन, संवर्धन व सुधारित प्रजनन के लिए सरकारी स्तर पर विशेष योजना व निधि मिलने का रास्ता साफ हो गया है. पुणे स्थित पशुसंवर्धन विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. शीतल कुमार मुकणे ने बताया कि बकरी व भेड विकास महामंडल के अलावा नागपुर स्थित महाराष्ट्र पशुधन विकास मंडल और कर्नाटक के कृषि व पशुवैद्यकीय विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों के इसके लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
* उंची कद-काठी और सफेद रंग है उमरडा गाय की पहचान
– 1910 की गैजेट में उल्लेख : अमरावती जिले के ब्रिटिशकालीन गैजेट (1910) में उमरडा गोवंश का उल्लेख है. उंची कद-काठी और सफेद रंग उमरडा गाय की पहचना है.
– बंजारा समाज करता है देखभाल : पश्चिम विदर्भ के यवतमाल, उसके पास अमरावती और वाशिम जिले में बंजारा समाज के लोग उमरडा गाय की पांरपारिक तरीके से देखभाल करते है.
– इन तहसीलों में प्रमुख रूप से पाई जाती है : यवतमाल के दिग्रस, दारव्हा, आर्णी तहसील, वाशिम के मानोरा, मंगरूलपील, कारंजा (लाड) तहसील और अमरावती के नांदगांव खंडेश्वर तहसील में उमरडा गाय पाई जाती है.
– 100 वर्ष पहले विकसित की गई माडग्याल भेड : भेड पालकों के मुताबिक सांगली जिले में लगभग 100 वर्ष पहले माडग्याल की नस्ल को विकसित किया गया था. माडग्याल बडे आकार और मटन के लिए विशेष रूप से लोकप्रिय भेड है.
* इससे पहले दक्खनी भेड को मिली है मान्यता
इससे पहले देश की कुल 45 मान्यता प्राप्त भेडों की नस्लों में महाराष्ट्र की केवल ‘दक्खनी भेड’ की ही राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त थी. जब किसी नस्ल को राष्ट्रीय मान्यता मिलती है, तो उसे हर पांच साल में होने वाली पशुगणना में शामिल किया जाता है.
* महाराष्ट्र में विकसित उमरडा
गाय को स्वतंत्र देशी गोवंश और माडग्याल भेड को स्वतंत्र अधिकृत प्रजाति के रूप में राष्ट्रीय मान्यता मिलना राज्य के पशुपालकों के लिए गर्व की बात है. यह निर्णय भविष्य में पशुपालकों की आय बढाने में उपयोग साबित होगा
– पंकजा मुंडे ,पशुसंवर्धन मंत्री, महाराष्ट्र.

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