भक्त चतुर्भुजदास जी के जीवन प्रसंगों का सुंदर वर्णन
श्री अष्टसखा चरित्रामृत कथा का षष्टम दिवस

पू.गो.पा. श्री हरिराय जी महोदय श्री के हस्ते पत्रकारों का सत्कार
अमरावती/दि.7 – प. पू. 108 गोस्वामी श्री हरिरायजी महोदय के मुखारबिंद से अष्टसखा वचनामृत कथा का श्रवण हम कर रहे है. आज छठे दिन की कथा श्री नंददास ही जीवन चरित्र पर आधारित है. आज की कथा के महाप्रसाद उत्सव मनोरथी गो. वा् श्रीमती गोमतीबाई जयनारायण भैया परिवार की ओर से ब्रिजगोपाल भैया, सुभद्रा देवी, श्याम भैया, गिरीश मधुसुदन, ज्योति सतीश भैया व परिवारजन तथा मन्नूभाई मधुसूदन जवेरी परिवार सदस्यों के साथ उत्सव मनोरथी श्री किरणभाई टापर परिवार के सदस्योें ने आचार्य गोस्वामी श्री बल्लभाचार्य की छवि का पूजन किया व पू. जे जे का पुष्पमालार्पण कर आशीर्वाद लिया. सुंदर संचालन करते हुए प्रस्तावना में डॉ. घनश्याम बाहेती ने अभी तक की कथा का सार स्मरण कराया.
* सेवक की सुखरासी सदा श्री वल्लभ राजकुमार
आज एकादशी के दिन श्री चतुर्भुजदासजी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए पूज्य जे जे ने कहा, शुकदेवजी ने 16 वर्ष में जन्म लिया. 16 संस्कार मां के गर्भ में ही पूर्ण कर लिए. कुंभनदास जी को ठाकुर जी ने वर दिया कि, आपको सत्संग के लिए पुत्र मिलेगा. चतुर्भुज दासजी ने नियम बनाया था कि जब तक गुंसाई जी के दर्शन नहीं करते स्तनपान नहीं करते थे.
* नाम कैसे पडा, रोचक किस्सा
एक समय श्री ठाकुरजी माखन चोरी करने गए. कुंभनदासजी के कंधे पर बैठकर दो हाथों से मटकी पकडी. उनकी कमर काचनी सरकने लगी. तब उन्होंने दो हाथों से कमर काचनी पकडी. तब कुंभनदासजी को प्रभु की चार भुजाओं के दर्शन हुए. उसी दर्शन को मन में बसाकर उन्होंने अपने पुत्र का नाम चतुर्भुज रखा. दान की लीला की नायिका चंद्रावली है. रास की लीला की नायिका श्री राधाजी है. जो मित्र होता है. वह दास नहीं होता. जो दास होता है. वह मित्र नहीं होता. चतुर्भुज व ठाकुरजी आपस में मित्र भी थे, दास भी थे. उनमें मित्रता तथा दासत्व दोनों भाव थे. खुद के स्वार्थ के लिए प्रभु को श्रम नहीं देना चाहिए. राधाजी ने चतुर्भुजदास को 12 महीनों की 6 ऋतुओं का दर्शन कराया. प्रत्येक ऋतु के 6 राग गाए याने 36 राग गाये गए. सार का भाव का पद.
‘चुडियां तेरी बडी की वो मेरी’
कृष्ण दो है. एक ऑफीस वाला. एक घरवाला.
हम घर वाले कृष्ण की पूजा करते हैं.
उदाहरण देकर समझाया. कृष्ण के दो स्वरूप का वर्णन किया.
श्री गोवर्धनवासी सांवरीे लाल
तुम बिन रहयो न जाए.
इस पद को स्पष्ट भाव से समझाया. प्रभु के इंतजार में यह पद गाया. चतुर्भुज दासजी ने यहां पूज्य जे जे प्रेम की 10 अवस्थाओं का बखान किया.
तेरे कारण मुझमें प्राण है तथा तू ही प्राण है यही अंतर गोपी गीत का मार्ग है. अब गोपियों की विनती सुनकर प्रभु ने वचन दिया कि मैं शीघ्र आ रहा हूं. 2 महीने 22 दिन बाद पधारे और चतुर्भुज दासजी को प्रेम दिया.
मंगलवार की कथा विश्रांती पर मनोरथियों के साथ ही पत्रकारों का भी उपरना से सत्कार किया गया. इस समय जयमाला चितलांगे, नेहा जलार, मीनाक्षी बेन, कृष्ण बेन, गायत्री पुरोहित, अमित सेठ, अंजली अनुज सावलिया, आशाबेन भीमजियानी, नूतनबेन राजकोटिया, भूमिबेन सेठ, कविता लढ्ढा, भक्ति लढ्ढा, वैदही लढ्ढा, राजकुमारी पनपालिया, सपना पनपालिया, मोहनी राठी, वंदना दम्माणी, शशी दम्माणी, केशव लढ्ढा, इंदुबेन मालविया, अर्चना भैया, नेहा राजा, हेतल हिंडोचा, पुष्पा मुंधडा, लता मुंधडा, दिप्ती मुंदडा, सोनम संदलिया, तरूबेन तन्ना, उमा धीरन, उषा वर्मा, श्याम दम्माणी, रेखा डागा, शोभा मोड, प्रीति देसाई, सरोज उडीच, रेखा पारेख, जोत्सना लोटिया, चेतना सेठ, पल्लवी गगलानी, नीतु लाखानी, शकुंतला दम्माणी, दीना चाबडा, दृष्टि राजा, ज्योत्स्ना मोहन शाह, शोभना शाह, रंजनाबेन जसापरा, नीलमबेन सांगाणी, मधु सेठ, अलका जसापरा, अरूणा वोरा, सायली शाह, जयश्री वर्मा, राजश्री वर्मा, अशोक मोड, रतिभाई हिंडोचा, नटवर भाई जनानी, ब्रिजगोपाल भैया, सतीश ब्रिजगोपाल भैया, गोविंददास दम्माणी, किरणभाई टापर, प्रदीप कोठारी, शैलेश ब्रजलाल जसापरा, राजीव जवेरी, डॉ. ओमप्रकाश बजाज, जयेश राजा, राजेंद्र तारकस, हसमुख परमार, प्रकाशचंद चांडक, गोपालदास मुंदडा, शिवरतन हेडा, आर. ए. कारिया, दीपक कौंडण्य, दिलीप वजीर, गिरीश भैया, मधु भैया, राजेंद्र मंत्री, उमेश मुंदडा, राजेन्द्र मालविया, राजेश कृष्णदास सराफ, नरेंद्र गिरधरलाल वाणी, अशोक अटल, भरतभाई शिंगारा, घनश्याम नाथालाल, भीमजियानी, नीतेश शाह, आशीष शांतिलाल रायचुरा, अजय आडतिया, विजय संतोषिया, संजय अमृतलाज गांधी, भरत देवकीनंदन अग्रवाल, राजेश माणीलाल आनंदपारा, प्रवीण लढ्ढा, विजय धानक, राजुभाई धानक, चंदेश गादोया, संदीप जयकिसन भैया, गिरीश मुंदडा, सनीभाई मकवाना, दिलीप नरसिंगदास अढीया, हितेश मदनलाल आडतिया, सूर्यकांत पारेख, रजनीकांत शाह, जुगलकिशोर लढ्ढा, सिध्दार्थ श्राफ, मयूर श्राफ, शरद श्राफ, तुषार श्राफ, जगदीश राजा, हितेन भाई जनानी, पंकज सेठ, मिलन धीरेंद्र सेठ, मिहिर राजा, प्रेमलता दम्माणी, जसुमती गोरीला, संगीता चांडक, पुष्पा राठी, वीणा राठी, राधा डागा, रेखा सादाणी, कस्तुरी संतोष मोदानी, निकिता जसापरा, रेखा मोहोकार, पुष्पा शर्मा, हर्षा भूतडा, ज्योति ठक्कर, दिव्या गगलानी, पुर्वी गगलानी, नूतन प्रशांत बक, रंजना दीपक मानका, सरला हनुमानजी मानका, प्रीति भिमजियाणी, संगीता नितिन रायचुरा, पल्लवी दीपक रायचुरा, राधा सारडा, वसंती नरेंद्रकुमार टावरी, किर्ती भरत राजकोटिया, दीपा राजकोटिया, दक्षा भिमजीयाणी, लक्ष्मी भिमजीयाणी, ममता भिमजीयाणी, ममता भिमजीयाणी, प्रीति भिमजीयाणी, सोनम रविन्द्र दवे, वेनुबेन जोशी, मेघना पारेख, सविता डागा, उर्मिला गांधी, किरण राठी, एकता बावरिया, नेहा शहा, जागृति शाह, मीना कोठारी, माया अग्रवाल, नेहा हिंडोचा, पल्लवी रायचुरा, शुभांगी शाह, नम्रता गोवर्धन आशा मालाणी, किरण गिलडा, आशा राठी, प्रीती पुरवार, अंजु सागलानी, निशा तन्ना, कांता केला, प्रमिला राठी, सोनम जसापरा, टीना, आशा जसापरा, दिशा जसापरा, सायली जसापरा, शांता कासट, रजनी कारिया, नीरूजैन कारिया, रजनबेन बुध्ददेव, भारतीबेन बुध्ददेव, उषा बुध्ददेव, डिंपल चंद्रकांत आनंदपरा, नीता नांदुरकर, सोदुर्ला आनंदपरा, इंदरा आनंदपरा, कविता सोनी,स्नेहा दुवाणी, पन्ना आडतिया, मनीषा आडतिया, ज्योति बखारिया, तन्वी अमोल श्राफ, सीमा अमोल श्राफ, विजयाबेन सराफ, शशीबेन सराफ, सुधाबेन राजेन्द्रभाई तारकस, प्रेेमलता दम्माणीस, शीतल सूरज चांडक, शोभा चांडक, चंद्रकला मुंदडा, ज्योत्सना परमार, दिशा रायचुरा, संगीता श्राफ, अलका श्राफ, संगीता नादयावा, छाया लोटिया, रेखा बसतानी, दीपा मोड, वसुधा शाह, मणिबेन पहेल, सुविध वाणी, भाविका सराफ, तारा चवडा, जसुमती गोहिल, वनिता परमार, विमल शर्मा, मनीषा पटेल, उषा दुवे, शांता कलंत्री, प्राची गांधी, सुवर्णा सोमाणी, सोनिया तापडिया, सुनीता मंत्री, नीता कात्रेला सहित वैष्णव बंधु-भगिनी की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही.
(प्रस्तुति श्याम दम्मानी नीलेश)





