40 दिनों के सूखे में 36 किसानों ने की आत्महत्या
अमरावती जिले में किसानों की आत्महत्याओं में फिर बढ़ोतरी

सितंबर में 28 और अक्टूबर के शुरुआती नौ दिनों में 8 किसानों की मौत
अमरावती /दि.15- कम बारिश, फसलों की बर्बादी और बढ़ते आर्थिक संकट ने अमरावती जिले के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सूखे जैसे हालात के बीच किसानों की आत्महत्याओं के आंकड़े चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं. सितंबर के 30 दिनों में 28 और अक्टूबर के शुरुआती नौ दिनों में 8 किसानों ने आत्महत्या की. इस तरह महज 40 दिनों में 36 किसानों की मौत हो चुकी है. किसानों की लगातार हो रही आत्महत्याओं ने कृषि संकट की गंभीरता को एक बार फिर उजागर किया है.
जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान बारिश की भारी कमी रही. मानसून के आगमन में लगभग तीन सप्ताह की देरी और अगस्त में फसलों की वृद्धि के महत्वपूर्ण समय पर बारिश नहीं होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. मूंग, उड़द और सोयाबीन की फसलें सबसे अधिक प्रभावित हुईं. कई किसानों के लिए फसल उत्पादन से खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है.
* खरीफ की बर्बादी, रबी पर भी संकट
इस वर्ष खरीफ सीजन में जिले में औसत की तुलना में लगभग 44 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई. बारिश के अभाव में खेतों की नमी कम हो गई, जिसका सीधा असर फसलों की वृद्धि और उत्पादन पर पड़ा. अब इसका असर रबी सीजन पर भी दिखाई देने लगा है. बारिश की कमी, मिट्टी में नमी का अभाव, भूजल स्तर में लगभग 10 फीट तक गिरावट और सिंचाई के लिए पानी की कमी के कारण रबी की बुवाई प्रभावित होने की आशंका है. पिछले वर्ष जिले में रबी फसलों की बुवाई का अनुमानित क्षेत्र लगभग 2 लाख हेक्टेयर था. इस वर्ष यह घटकर करीब 75 हजार हेक्टेयर रहने का अनुमान है. इससे बुवाई के क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका जताई जा रही है. रबी सीजन से होने वाली आमदनी किसानों के लिए आर्थिक संकट से उबरने का एक महत्वपूर्ण सहारा होती है. लेकिन इस बार पानी की कमी के कारण यह उम्मीद भी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है.
* कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी बड़ी वजह
किसानों की आत्महत्या के पीछे कई आर्थिक, सामाजिक और प्राकृतिक कारण सामने आते हैं. इनमें प्राकृतिक आपदाएं, फसल खराब होना, सूखा, बैंकों और निजी साहूकारों से लिया गया कर्ज, बेटियों की शादी का खर्च, बीमारी और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियां शामिल हैं. फसल से पर्याप्त आमदनी नहीं होने पर किसानों के लिए कर्ज चुकाना, अगली फसल की तैयारी करना और परिवार का खर्च चलाना कठिन हो जाता है. ऐसे हालात में किसानों को समय पर आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो जाता है.
* जिले में अब तक 5,688 किसानों ने की आत्महत्या
जनवरी 2001 से अमरावती जिले में किसानों की आत्महत्याओं का अलग रिकॉर्ड रखा जा रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक जिले में 5,688 किसानों की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से 2,309 मामले सरकारी सहायता के लिए अपात्र पाए गए हैं, जबकि 3,008 प्रभावित परिवारों को एक लाख रुपये की सरकारी आर्थिक सहायता दी गई है. इसके अलावा, 71 मामले अभी भी जांच के लिए लंबित हैं. ये आंकड़े किसानों के संकट के साथ-साथ आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचाने और लंबित मामलों का निपटारा करने की आवश्यकता को भी सामने लाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक जून में 7 मामलों से शुरू हुआ सिलसिला सितंबर में बढ़कर 28 तक पहुंच गया. अक्टूबर के शुरुआती नौ दिनों में भी आठ किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए. लगातार बढ़ते आंकड़े ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती-किसानी के सामने खड़े संकट की गंभीरता दर्शाते हैं.
* किसानों को कर्जमाफी और अन्य योजनाओं का लाभ
निवासी उपजिलाधिकारी संतोष काकड़े ने बताया कि किसानों को दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी योजना का लाभ दिया जा रहा है. कृषि विभाग सहित अन्य विभागों की योजनाओं के माध्यम से भी किसानों की मदद की जा रही है. उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में सरकार और प्रशासन किसानों की सहायता कर रहे हैं.
* राहत और सहायता समय पर पहुंचाना बड़ी चुनौती
कम बारिश से खरीफ की फसलें प्रभावित हुई हैं और रबी सीजन पर भी संकट मंडरा रहा है. ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होने की आशंका है. लगातार सामने आ रहे आत्महत्या के मामले इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं कि संकटग्रस्त किसानों की पहचान, समय पर आर्थिक सहायता, फसल नुकसान का आकलन और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कितना महत्वपूर्ण है. खेती पर निर्भर परिवारों को इस संकट से उबारने के लिए केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि समय पर राहत, सिंचाई के विकल्प और जरूरतमंद किसानों तक प्रभावी मदद पहुंचाना भी जरूरी है.
* जून से अक्टूबर तक बढ़ते गए आत्महत्या के मामले
महीना आत्महत्या के मामले
जून 07
जुलाई 15
अगस्त 20
सितंबर 28
अक्टूबर (पहले 9 दिन) 08





