अकोला में 5 करोड़ के भूखंड की कथित फर्जी बिक्री का मामला

ठाकरे गुट के युवा सेना जिलाध्यक्ष समेत तीन गिरफ्तार

* 5,075 वर्गफुट के भूखंड के फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप
* 84 वर्षीय वास्तविक मालकिन की जगह दूसरी महिला को खड़ा करने का भी दावा
अकोला/दि.29 – शहर के मलकापुर क्षेत्र में करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य के 5,075 वर्गफुट के भूखंड की कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है. अकोला पुलिस की स्थानीय अपराध शाखा ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की युवा सेना के अकोला जिलाध्यक्ष आस्तिक श्रीकृष्ण चव्हाण भी शामिल हैं. राजनीतिक दल से जुड़े पदाधिकारी की गिरफ्तारी के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है. पुलिस के अनुसार, मलकापुर क्षेत्र का उक्त भूखंड 84 वर्षीय शांता बाहेकर के नाम पर है. भूखंड के कथित फर्जी हस्तांतरण को लेकर शिकायत मिलने के बाद स्थानीय अपराध शाखा ने जांच शुरू की.
पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर शांता बाहेकर के नाम से फर्जी मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार किया. इसके आधार पर भूखंड की बिक्री के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार किए गए. पुलिस का आरोप है कि वास्तविक मालकिन शांता बाहेकर की जगह किसी अन्य महिला को शांता बाहेकर के रूप में पेश किया गया. इसके बाद इस महिला के माध्यम से कथित तौर पर फर्जी बिक्री विलेख तैयार कर भूखंड का सौदा किया गया.
मामले में पुलिस ने आस्तिक श्रीकृष्ण चव्हाण, राहुल जाधव और प्रियंका पाटील उर्फ प्रियंका चव्हाण को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार प्रियंका पाटील, आस्तिक चव्हाण की रिश्तेदार हैं. प्रारंभिक जांच में तीनों के कथित रूप से मिलीभगत से भूखंड का व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि, प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भूमिका की जांच अभी जारी है.
शिकायत मिलने के बाद स्थानीय अपराध शाखा ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की. पुलिस के अनुसार, करीब दो घंटे के भीतर तीनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने तीनों आरोपियों को छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी मुख्तारनामा और बिक्री विलेख कहां तैयार किए गए तथा इन्हें तैयार करने में किन लोगों की मदद ली गई. साथ ही पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पूरे कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोग अथवा कोई सरकारी कर्मचारी या संस्था शामिल थी या नहीं. भूखंड की कीमत करीब पांच करोड़ रुपये होने के कारण पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है. जांच आगे बढ़ने पर इस कथित भूखंड घोटाले में और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है.

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