मनोज जरांगे पाटील का 11वां आमरण अनशन शुरू

मराठा आरक्षण सहित लंबित मांगों पर तत्काल अमल का दबाव

* जाति सत्यापन समितियां भंग करने की मांग, समाधान नहीं तो मुंबई कूच
* सीएम के आवास ‘वर्षा’ बंगले अथवा आजाद मैदान में आंदोलन का संकेत
जालना/दि.29 – मराठा आरक्षण और कुणबी प्रमाणपत्र से जुड़े मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र का राजनीतिक एवं सामाजिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है. मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने शनिवार को अंतरवाली सराटी में अपना 11वां आमरण अनशन शुरू कर दिया. उन्होंने राज्य सरकार से मराठा समाज की विभिन्न मांगों पर तत्काल निर्णय लेकर उनकी प्रत्यक्ष अमलदारी करने की मांग की है. साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अंतरवाली सराटी में समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को मुंबई तक ले जाया जाएगा.
जरांगे पाटील ने इस बार महाराष्ट्र की जाति सत्यापन समितियों को स्थायी रूप से भंग करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है. उनका तर्क है कि जब तहसीलदार, एसडीएम अथवा सक्षम अधिकारी आवश्यक दस्तावेजों और प्रमाणों की जांच के बाद कुणबी प्रमाणपत्र जारी करते हैं, तो उसके बाद दोबारा जाति सत्यापन की प्रक्रिया क्यों आवश्यक है. उन्होंने दावा किया कि अन्य राज्यों में ऐसी समितियां नहीं हैं और महाराष्ट्र में भी इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए.
उपोषण शुरू करने से पहले जरांगे पाटील ने सरकार पर पिछले तीन वर्षों से समय टालने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार दो-चार महीने का समय मांगती रही, लेकिन अब तीन वर्ष बीत चुके हैं. उनके अनुसार, अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और मांगों की वास्तविक अमलदारी होने तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे. जरांगे ने कहा कि उनका संघर्ष मराठा समाज के बच्चों और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए है. उन्होंने सरकार से तत्काल समाधान निकालने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन का अगला चरण मुंबई में होगा.
जाति सत्यापन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जरांगे ने आरोप लगाया कि प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कुणबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले, हैदराबाद गजट के मानदंडों के आधार पर आवेदन करने वाले तथा प्रमाणपत्र अथवा वैधता प्रमाणपत्र से वंचित लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जाति सत्यापन प्रक्रिया में दस्तावेजों पर आपत्तियां उठाए जाने के कारण विद्यार्थियों के प्रवेश और अन्य अवसर प्रभावित होते हैं. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और समितियों का पक्ष सामने आना बाकी है.
* सातारा-कोल्हापुर गजट समेत कई मांगें
जरांगे पाटील के आंदोलन की मांगें केवल कुणबी प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने सातारा-कोल्हापुर गजट के संबंध में तत्काल जीआर जारी कर उसकी अमलदारी, मराठा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने तथा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले युवाओं के परिवारों को आर्थिक सहायता और नौकरी देने की मांग की है. इसके अलावा मराठा विद्यार्थियों से ली गई शैक्षणिक फीस का 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, अण्णासाहेब पाटील आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से कर्ज लेने वाले युवाओं को ब्याज की वापसी तथा एसईबीसी, ईएसबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी से चयनित लेकिन नियुक्ति से वंचित उम्मीदवारों को तत्काल नियुक्तियां देने की मांग भी उन्होंने रखी है. जरांगे ने मराठा-कुणबी समाज के लिए स्वतंत्र मंत्रालय स्थापित करने, सारथी की योजनाओं, पीएचडी फेलोशिप और पंजाबराव देशमुख छात्रवृत्ति की लंबित राशि जारी करने तथा एमपीएससी विद्यार्थियों को दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि देने की मांग भी दोहराई.
* आंतरवाली में समाधान नहीं तो मुंबई जाएंगे
जरांगे पाटील ने संकेत दिया कि यदि सरकार अंतरवाली सराटी में उनकी मांगों का समाधान नहीं करती है तो आंदोलन मुंबई तक ले जाया जाएगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वर्षा बंगले अथवा आजाद मैदान में आंदोलन किया जा सकता है. उन्होंने मुंबईवासियों से भी अपील की कि यदि आंदोलन मुंबई तक पहुंचता है तो कुछ समय के लिए होने वाली असुविधा को सहन करें. हालांकि, उन्होंने आंदोलन को अनुशासित और शांतिपूर्ण रखने के निर्देश भी दिए. जरांगे ने यह भी संकेत दिया कि मुंबई जाने के संबंध में आगे की रणनीति पर शनिवार शाम निर्णय लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के लिए आती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन अब केवल चर्चा नहीं बल्कि ठोस निर्णय और उसकी अमलदारी अपेक्षित है.
* समर्थकों से सक्रिय भागीदारी की अपील
जरांगे पाटील ने मराठा समाज से आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि केवल समर्थन देने की बात करने के बजाय समाज के लोगों को प्रत्यक्ष रूप से आंदोलन में शामिल होना चाहिए. उन्होंने इसे अपनी ‘अंतिम लड़ाई’ बताते हुए समाज से एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने स्थानीय नेताओं को लेकर भी तीखा रुख अपनाया और कहा कि यदि गांवों तथा स्थानीय स्वराज संस्थाओं से जुड़े नेता आंदोलन से दूर रहते हैं तो उनके नाम सामने लाए जाएं. आगामी चुनावों में जनता इसका जवाब देगी, ऐसा संकेत भी उन्होंने दिया.
* सरकार की ओर से बातचीत के प्रयास
दूसरी ओर, राज्य सरकार आंदोलन को मुंबई तक पहुंचने से पहले बातचीत के जरिए हल करने का प्रयास कर रही है. मराठा आरक्षण मंत्रिमंडलीय उपसमिति के प्रतिनिधियों ने जरांगे पाटील से चर्चा की है. समिति के सदस्य शंभूराज देसाई ने कुणबी रिकॉर्ड, वंशावली के सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर सरकार का पक्ष रखा है. सरकार की ओर से यह कहा गया है कि बड़ी संख्या में उपलब्ध कुणबी रिकॉर्ड का परीक्षण और संबंधित दावों की जांच प्रक्रिया के तहत की जा रही है. वहीं जरांगे पाटील का कहना है कि अब आश्वासन के बजाय निर्णयों की जमीन पर अमल दिखाई देना चाहिए.
* अंतरवाली में कड़ा पुलिस बंदोबस्त
जरांगे के उपोषण को देखते हुए अंतरवाली सराटी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 400 पुलिसकर्मी, चार डीवाईएसपी, 11 पुलिस निरीक्षक, आरसीपी की तीन प्लाटून और एक एसआरपीएफ कंपनी तैनात की गई है. आंदोलन स्थल और प्रमुख मार्गों पर पुलिस की अस्थायी चौकियां भी बनाई गई हैं.

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