अब सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया है, सरकार नहीं सुधरी तो उसे भी बदल देंगे
संभाजीनगर पहुंचते ही अभिजीत दीपके का केंद्र सरकार को खुला संदेश

* 36 दिन के आंदोलन के बाद घर लौटे सीजेपी संस्थापक, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना
छत्रपति संभाजीनगर/दि.29- दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले बहुचर्चित छात्र आंदोलन की सफलता के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. 36 दिनों तक चले आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पहली बार अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे दीपके ने कहा कि छात्रों ने फिलहाल केवल एक मंत्री का इस्तीफा लिया है, लेकिन यदि सरकार ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली और छात्रों के साथ दमनात्मक रवैया जारी रखा, तो भविष्य में यही युवा सरकार बदलने की ताकत भी रखते हैं.
* संभाजीनगर में हुआ भव्य स्वागत
करीब 40 दिनों बाद अपने शहर लौटे अभिजीत दीपके के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में युवा एयरपोर्ट और शहर के प्रमुख मार्गों पर जुटे. समर्थकों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और जमकर नारेबाजी की. शहर में जगह-जगह उनका स्वागत किया गया. संभाजीनगर पहुंचने के बाद दीपके सबसे पहले क्रांति चौक स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पहुंचे और नमन किया. इसके बाद उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार पर जाकर डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की.
* 36 दिन का संघर्ष सफल हुआ
मीडिया से बातचीत करते हुए दीपके ने कहा कि 36 दिनों तक देशभर के छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई और अंततः आंदोलन को सफलता मिली. उन्होंने कहा कि यह किसी एक संगठन या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्रों की जीत है. दीपके ने कहा कि आंदोलन के दौरान हजारों छात्रों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन पीछे नहीं हटे. इसी दबाव के चलते केंद्र सरकार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा.
* लाठीचार्ज और कार्रवाई पर सरकार को घेरा
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह दुर्भाग्यपूर्ण था. उन्होंने दावा किया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी कई राज्यों में छात्रों को परेशान किया जा रहा है. पुलिस द्वारा छात्रों के घर जाकर पूछताछ करने, नोटिस देने और कार्रवाई की चेतावनी देने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं. दीपके ने कहा कि छात्रों को अपराधी या देशविरोधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि वही देश का भविष्य हैं.
* युवा शक्ति को कम आंकना सरकार की भूल होगी
अपने सबसे तीखे बयान में दीपके ने कहा कि छात्रों ने अभी केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया है. यदि सरकार ने युवाओं की भावनाओं को समझने के बजाय दमन की नीति अपनाई, तो आने वाले समय में यही युवा लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन का कारण भी बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि देश का युवा अब अपने अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था और भविष्य के सवालों पर पहले से अधिक जागरूक हो चुका है.
* राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
दीपके के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है. छात्र आंदोलन के बाद पहली बार उन्होंने इतने स्पष्ट शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छात्र संगठनों की सक्रियता आगे भी बनी रही, तो यह आंदोलन केवल शिक्षा के मुद्दे तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का रूप भी ले सकता है. फिलहाल, अभिजीत दीपके का संभाजीनगर दौरा और उनका यह बयान राज्य तथा राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है. विपक्षी दल जहां इसे युवाओं की आवाज बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं.





