किसानों के लिए खुशखबर!
राज्य के हर टोल नाके पर कृषि मॉल

* सार्वजनिक निर्माण विभाग का बड़ा फैसला
मुंबई/दि.6 – राज्य के किसानों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है. किसानों का कृषि उत्पाद बेचने के लिए अब राज्य के हर टोल नाके पर कृषि मॉल (एग्री मॉल) बनाए जाएंगे. राज्य के सार्वजनिक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने इस संदर्भ में पहल करते हुए यह बड़ा कदम उठाया है. किसानों के लिए बनाए जाने वाले इन मॉल के माध्यम से किसान अपना कृषि उत्पाद सीधे ग्राहकों को बेच सकेंगे. खेत से सीधे टोल नाके पर कृषि उत्पाद बेचने का बड़ा अवसर किसानों को मिलेगा. इससे समय, अतिरिक्त यात्रा खर्च और किसानों का श्रम भी बचेगा. वहीं, यात्री इन टोल नाकों पर बने मॉल से ताजी सब्जियां और कृषि उत्पाद खरीद सकेंगे, जिससे ग्राहकों के लिए भी यह अधिक सुविधाजनक होगा.
इस बीच, खेत के पास बिक्री केंद्र होने से इसका फायदा किसानों को होगा. वहीं, बाजार से सस्ती और ताजी सब्जियां मिलने से ग्राहकों को भी इसका लाभ मिलेगा. इसके लिए हर टोल नाके पर सार्वजनिक निर्माण विभाग कृषि उत्पादों के लिए मॉल बनाएगा, ऐसी जानकारी है. इससे पहले भाजपा सरकार ने शहरों में साप्ताहिक बाजार शुरू कर किसानों के लिए नई बाजारपेठ तैयार की थी. उसके बाद यह बड़ा निर्णय लिया गया है, जिससे किसान वर्ग में संतोष व्यक्त किया जा रहा है.
* भंडारा में बेमौसम बारिश से नुकसान
भंडारा में कल शाम के समय तेज हवा और गरज-चमक के साथ कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई. कहीं हल्की तो कहीं तेज बेमौसम बारिश के कारण कटाई के लिए तैयार धान की फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई. इस बेमौसम बारिश के कारण धान की बालियां झड़ गईं और कई खेतों में खड़ी फसल गिर गई, जिससे किसानों पर आर्थिक संकट आ गया है. किसानों ने नुकसान का तुरंत पंचनामा कर आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है.
* बुलढाणा जिले में 74,000 मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध
आगामी खरीफ सीजन के मद्देनजर बुलढाणा जिले में खाद का स्टॉक संतोषजनक होने के बावजूद कालाबाजारी की कई घटनाएं सामने आई हैं. वर्तमान में जिले में 74,181 मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है, जबकि 1 लाख 91 हजार मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति को मंजूरी दी गई है, ऐसी जानकारी कृषि विभाग ने दी है. बुवाई के समय खाद की कमी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. हालांकि वर्तमान में स्टॉक संतोषजनक है, फिर भी बुलढाणा जिले में खाद की कालाबाजारी की घटनाएं सामने आ रही हैं. इस पर कृषि अधीक्षक और कृषि विभाग नियंत्रण करने में असफल साबित हो रहे हैं.





