शिंदे की सांसद पाटिल से भेंट के बाद ठाकरे का भी फोन
उबाठा गुट हुआ सतर्क

* डीसीएम शिंदे ने अस्पताल जाकर पूछा था सांसद पत्नी का हालचाल
* राज्य में फिर ऑपरेशन टायगर की चर्चा
मुंबई /6- मुंबई में एक राजनीतिक मुलाकात से राज्य के राजनीतिक हलकों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है. सत्ताधारी शिवसेना के सर्वेसर्वा तथा राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाकरे गुट के सांसद संजय दिना पाटील से अस्पताल जाकर मुलाकात की. इसके बाद ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी तुरंत हलचल करते हुए अपने विश्वासपात्रों को संजय पाटील से मिलने भेजा. साथ ही खुद भी उनसे बातचीत की. परिणामस्वरूप, इन मुलाकातों को केवल सहानुभूति का हिस्सा माना जाए या इसके पीछे बड़ा राजनीतिक गणित है, इस पर अब चर्चा शुरू हो गई है.
इससे संबंधित घटनाओं की शुरुआत सांसद संजय दिना पाटील के परिवार में हुई एक दुर्घटना से हुई. कुछ दिन पहले संजय पाटील की पत्नी का एक्सीडेंट हुआ. उनका फिलहाल मुंबई के मुलुंड स्थित फोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा है. यह जानकारी मिलते ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को समय निकालकर स्वयं अस्पताल जाकर पाटील से मुलाकात की. उन्होंने उनकी पत्नी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और कुछ समय दोनों के बीच बातचीत भी हुई. यह मुलाकात मानवीय संवेदनाओं के तहत हुई हो, लेकिन इसके राजनीतिक असर दिखने में देर नहीं लगी.
* राज्य में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा
राज्य में पहले से ही ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा चल रही है. शिंदे गुट की ओर से विरोधी गुट के कुछ नेताओं को अपनी ओर लाने की कोशिशों की चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में शिंदे द्वारा ठाकरे गुट के सांसद से मुलाकात करने से इन चर्चाओं को और बल मिला है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं थी. इसके पीछे कुछ संकेत छिपे हो सकते हैं. इसलिए उद्धव ठाकरे और विधायक आदित्य ठाकरे ने भी बिना देरी कदम उठाए. उन्होंने खुद फोन कर संजय दिना पाटील से बात की और उनकी पत्नी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली.
इतना ही नहीं, उद्धव ठाकरे ने अपने विश्वासपात्र नेताओं को आगे कर स्थिति पर नजर रखी. विधायक मिलिंद नार्वेकर और सचिन अहिर ने सीधे अस्पताल जाकर पाटील से मुलाकात की. इन सभी गतिविधियों से स्पष्ट हो गया है कि ठाकरे गुट भी अपने नेताओं से संपर्क मजबूत रखने की कोशिश कर रहा है. खासकर वर्तमान राजनीतिक माहौल में, दलों के अंदर हलचल और नेताओं का स्थानांतरण सामान्य बात बन गई है. ऐसे में हर नेता की निष्ठा बनाए रखना दोनों गुटों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है. इसलिए इन मुलाकातों का अर्थ केवल व्यक्तिगत सहानुभूति तक सीमित नहीं रह जाता.
* व्यक्तिगत संबंध मजबूत करने पर जोर
उल्लेखनीय बात यह है कि शिंदे और ठाकरे गुटों के बीच फिलहाल ‘सॉफ्ट पावर’ का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस मामले में दोनों गुट सीधे आरोप-प्रत्यारोप या राजनीतिक हमलों के बजाय व्यक्तिगत संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं. ऐसी मुलाकातों के जरिए एक ओर सहानुभूति दिखाई जाती है, तो दूसरी ओर अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश की जाती है. यही कारण है कि इन मुलाकातों का महत्व और बढ़ गया है.





