तिवसा के बड़े गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ग्रामीण अस्पताल बनाने की मांग विधानसभा में गूंजी

* ग्रामीणों के लिए विधायक राजेश वानखडे ने मानसून सत्र में मांग उठाई
अमरावती /दि.11 – तिवसा विधानसभा क्षेत्र के अधिक आबादी वाले गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 30 बिस्तरों वाले ग्रामीण अस्पतालों में उन्नत करने तथा रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की मांग विधायक राजेश वानखड़े ने महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में प्रभावी ढंग से उठाई.
विधायक राजेश वानखड़े ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि तिवसा विधानसभा क्षेत्र के माहुली जहांगीर, वलगांव, नेरपिंगलाई, कुर्हा और खोलापुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव है. सीमित सुविधाओं के कारण लोगों को उपचार के लिए दूरस्थ तहसील अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. ऐसे में इन पीएचसी को 30 बिस्तरों वाले ग्रामीण अस्पतालों में अपग्रेड करना समय की आवश्यकता है. जवाब में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्वीकार किया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन के लिए वर्तमान मानदंडों में बदलाव की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि सरकार जनप्रतिनिधियों की मांग और मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार एक व्यापक नीति तैयार कर रही है. नीति लागू होने के बाद विधायक राजेश वानखड़े द्वारा उठाए गए प्रस्ताव पर विशेष मामले के रूप में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा.
विधायक वानखड़े ने सदन में यह भी बताया कि इन स्वास्थ्य केंद्रों को ग्रामीण अस्पतालों में बदलने का प्रस्ताव उप संचालक स्वास्थ्य कार्यालय, अकोला की ओर से संयुक्त संचालक स्वास्थ्य को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है. उन्होंने मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की. उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों में रिक्त चिकित्सकीय एवं तकनीकी पदों को तत्काल भरने की आवश्यकता भी उठाई. विधायक ने बताया कि उनके प्रयासों से तिवसा विधानसभा क्षेत्र के करजगांव, नरसिंगपुर, डावरगांव और केकटपुर में चार नए स्वास्थ्य उपकेंद्रों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और उनका निर्माण कार्य जारी है. इस चर्चा में विधायक हरीश पिंपले तथा विधायक हीरामन खोसकर ने भी भाग लेते हुए कहा कि वर्तमान जनसंख्या के अनुरूप पुराने मानदंडों में संशोधन आवश्यक है. उन्होंने अधिक आबादी वाले गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर ग्रामीण अस्पतालों में उन्नत करने की मांग की. स्वास्थ्य मंत्री ने इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि सरकार व्यापक योजना के तहत इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी.





