विधान परिषद में मौका मिला तो शिंदे का विश्वस्त बनकर काम करुंगा
पूर्व मंत्री बच्चू कडू का कथन, अपनी भी कुछ शर्तें रहने की बात कही

* विधान परिषद के लिए नामांकन पत्र अपने पास रहने का भी किया दावा
* शिंदे सेना में नहीं होगा प्रहार पार्टी का विलय, बच्चू ने किया स्पष्ट
* किसानों, मजदूरों व दिव्यांगों के लिए काम करते रहने की बात कही
मुंबई /दि.29- प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और पूर्व मंत्री इरललर्ही घरर्वी ने विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि वे केवल पद के लिए राजनीति नहीं करते, बल्कि मुद्दों के लिए लड़ते हैं. उन्होंने साफ कहा कि यदि उन्हें विधान परिषद भेजा जाता है तो वे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सिपाही की तरह काम करेंगे, लेकिन किसानों, मजदूरों और दिव्यांगों के मुद्दों पर समझौता नहीं करेंगे.
मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में बच्चू कडू ने कहा, फॉर्म मेरी बैग में है. विधान परिषद दी, तो शिंदे का सिपाही बनकर काम करूंगा, लेकिन हमारे लिए दिव्यांग, किसान और मजदूर सबसे पहले हैं. सिर्फ पद के लिए समझौता करने वाला बच्चू कडू नहीं है. उन्होंने शिवसेना में प्रहार जनशक्ति पार्टी के विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की खबरें केवल अटकलों पर आधारित हैं. उन्होंने कहा कि प्रहार संगठन के एक लाख से अधिक सदस्य हैं और यह संगठन किसी के साथ सिर्फ सत्ता के लिए नहीं जाएगा. विलय की चर्चा सुनकर बुरा लगा. खबर से खबर बनाई गई है.
पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने यह भी बताया कि उन्हें विधान परिषद को लेकर प्रस्ताव पहले मीडिया के माध्यम से पता चला. उन्होंने स्वीकार किया कि मंत्री उदय सामंत से चर्चा हुई थी और डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात हुई थी, लेकिन इस विषय पर कोई ठोस बातचीत नहीं हुई. उन्होंने कहा कि पत्रकार परिषद के बाद यदि फोन आता है तो वे चर्चा के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, विलय पर चर्चा हो सकती है, लेकिन पहले यह तय होना चाहिए कि मुद्दे क्या हैं. किसान, मजदूर और दिव्यांगों को न्याय देना सबसे जरूरी है. यदि इनके लिए काम करना है तो निर्णय भी उसी आधार पर होना चाहिए.
इस समय पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने यह भी माना कि 2024 विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ जाने का निर्णय उनके मतदाताओं को पसंद नहीं आया. उन्होंने कहा कि प्रहार जनशक्ति पार्टी ने 38 सीटें लड़ीं, लेकिन सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि प्रहार की ताकत और जनाधार आज भी मजबूत है. राजनीतिक समीकरणों पर बोलते हुए पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने कहा कि प्रहार के साथ अन्याय करने की किसी में हिम्मत नहीं है. उन्होंने संकेत दिया कि यदि महायुति में जगह और सम्मान मिला, तो आगे की भूमिका पर विचार किया जा सकता है.
* शिंदे की बगावत में बच्चू कडू ने दिया था साथ
ज्ञात रहे कि, पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने किसी जमाने में शिवसेना से अलग होकर वर्ष 1999 में प्रहार जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी. जिसके बाद वे लगातार चार बार अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए और वर्ष 2019 में लगातार चौथी बार विधायक निर्वाचित होने के उपरांत तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्ववाली महाविकास आघाडी सरकार में मंत्री भी बने. लेकिन इसके उपरांत जून 2022 में शिवसेना नेता व तत्कालीन मंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना के खिलाफ की गई बगावत के दौरान बच्चू कडू ने शिंदे साथ दिया था. हालांकि, इसके उपरांत वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में बच्चू कडू ने एकनाथ शिंदे से अलग राह चुनने का निर्णय लिया. 2024 के विधानसभा चुनाव में प्रहार जनशक्ति पार्टी ने 38 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसके सभी उम्मीदवार पराजित हो गए. इस चुनाव में प्रहार जनशक्ति पार्टी को कुल 1.55 प्रतिशत यानी लगभग 3.07 लाख वोट मिले थे.
* विधान परिषद के लिए भाजपा ने किन नामों पर लगाया दांव
विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर दिए हैं. भाजपा की ओर से सुनील कर्जतकर, माधवी नाईक, संजय भेंडे, विवेक कोल्हे और प्रमोद जठार के नाम सामने आए हैं. वहीं विधान परिषद की उपचुनाव सीट के लिए प्रज्ञा सातव का नाम घोषित किया गया है.
* विधान परिषद में जीत के लिए 28 वोट का गणित
विधान परिषद चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट), शिवसेना (ठाकरे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के संभावित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा तेज हो गई है. विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के अनुसार भाजपा को 6 सीटें, शिवसेना को 2 सीटें, राष्ट्रवादी कांग्रेस को 1 सीट और महाविकास आघाड़ी को 1 सीट मिलने की संभावना है. विधान परिषद का एक सदस्य निर्वाचित होने के लिए 28 वोटों का कोटा आवश्यक है. विधानसभा में महायुति के पास मजबूत संख्याबल है. भाजपा के 131 विधायक, एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 57 विधायक और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस के 40 विधायक हैं. इस समीकरण के आधार पर महायुति के 8 उम्मीदवारों का निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है. दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी के पास कुल 46 विधायकों का संख्याबल है, जिसके आधार पर उसका केवल एक उम्मीदवार ही आसानी से जीत सकता है.
* 12 मई को होना है विधान परिषद का चुनाव
विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, जांच 2 मई, नाम वापसी 4 मई और मतदान 12 मई को होगा. नतीजे उसी दिन शाम 5 बजे घोषित किए जाएंगे.





