दिखने से नहीं, विचारों से स्मार्ट होना जरूरी : डॉ. जाधव

स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन-2026 का उत्साहपूर्ण शुभारंभ

* 100 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
अमरावती/दि.21 – डॉ. राजेंद्र गोडे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च में स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2026 का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ. ‘अनलॉक द नेक्स्ट जनरेशन ऑफ सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, तकनीकी कौशल, समस्या समाधान क्षमता और व्यावसायिक दृष्टिकोण विकसित करना था.
कार्यक्रम का उद्घाटन 18 अगस्त को माता सरस्वती तथा संस्थापक अध्यक्ष स्व. डॉ. राजेंद्र गोडे की प्रतिमा का पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. सी. एम. जाधव ने की. उपप्राचार्य डॉ. सागर जिरापूरे, राम मेघे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट के डॉ. अमोल भगत, नेक्स्ट जन इनोवेट टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं संचालक सुरेश पवार तथा सलाहकार एवं सह-समन्वयक प्रा. जी. एस. शेंदरे प्रमुख रूप से उपस्थित थे. उपप्राचार्य डॉ. जिरापूरे ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित न रहते हुए उसका उपयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए करना चाहिए. हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और समस्या समाधान क्षमता विकसित होती है.
प्राचार्य डॉ. जाधव ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में विद्यार्थियों को अपनी सोच और दृष्टिकोण में बदलाव लाना होगा. उन्होंने राष्ट्रीयकृत बैंकों में कंप्यूटरीकरण के शुरुआती दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि मनुष्य स्वभावतः बदलाव को लेकर संकोच करता है, लेकिन बदलाव ही स्थायी है. इसलिए बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को विकसित करना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि बहता पानी स्वच्छ रहता है, जबकि रुका हुआ पानी दूषित हो जाता है. इसी प्रकार व्यक्ति को भी निरंतर सीखते रहना चाहिए और खुद को अपडेट रखना चाहिए. पेटीएम, ओला और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीक, विचार और उद्यमिता के माध्यम से समाज की समस्याओं को अवसरों में बदला जा सकता है.
डॉ. जाधव ने कहा कि दिखने से स्मार्ट होने की बजाय विचारों से स्मार्ट होना अधिक महत्वपूर्ण है. विद्यार्थियों को स्थानीय, ग्रामीण, सामाजिक और दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं को पहचानकर उनके व्यावहारिक और प्रभावी समाधान विकसित करने चाहिए. उन्होंने पानी और दुग्ध व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी समस्या को सही तरीके से समझने पर नए विचारों के साथ व्यवसाय के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं. हैकाथॉन के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सामाजिक एवं व्यावहारिक समस्याओं पर आधारित अपनी नवीन अवधारणाएं और तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए. आयोजन को सफल बनाने में महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने योगदान दिया.
कार्यक्रम में प्रा. एस. एस. गलगट, प्रा. के. के. पडघन, प्रा. एस. यू. आंबाडेकर, प्रा. एस. एस. बोबडे, प्रा. एस. जी. धर्माले, प्रा. एस. पी. हाडोले, प्रा. एम. पी. एम. विटालकर, प्रा. आर. एन. सोलंके, प्रा. वी. ए. फुलारी, डॉ. आर. पी. सरोदे, प्रा. एम. आर. धावडे, प्रा. एच. एन. निमकर, प्रा. पी. आर. वानखेडे, प्रा. वाय. बी. भगत और प्रा. आर. आर. शर्मा, ए. जी. देशमुख, ए. बी. भेंडकर, एस. वी. शिवधरकर, कबीर पठाण, प्रवीण इंगले, सदानंद बैलकर, अमोल लकडे, प्रवीण काले सहित शिक्षकवृंद ने विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं. शिक्षकेतर कर्मचारियों ने भी आयोजन में सहयोग किया. संचालन प्रा. अश्विनी पुरेकर ने किया, जबकि आभार प्रा. सोनाली पवार ने माना.

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