मंदिरों की कृषि भूमि को किसानों की तरह नुकसानभरपाई दें

महाराष्ट्र देवस्थान समिति की मांग

प्राकृतिक आपदाओं से मंदिरों की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित
जिलाधिकारी को देवस्थान प्रतिनिधियों का ज्ञापन
अमरावती/दि.9 – अमरावती जिले में प्राकृतिक आपदा, बारिश न होना तथा अन्य कारणों से कृषि फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है. ऐसे में मंदिर एवं देवस्थानों के स्वामित्व वाली कृषि भूमि को भी किसानों की तरह फसल नुकसानभरपाई का लाभ दिया जाए, ऐसी मांग महाराष्ट्र देवस्थान समिति तथा विभिन्न देवस्थान संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने की है.
इस संबंध में जिलाधिकारी, अमरावती को ज्ञापन सौंपा गया. मंदिरों के स्वामित्व वाली कृषि भूमि से प्राप्त होने वाली आय का उपयोग मंदिरों के दैनिक व्यवस्थापन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, धार्मिक उत्सव, मंदिर रखरखाव, पुजारी एवं कर्मचारियों के मानधन तथा विभिन्न सामाजिक एवं जनोपयोगी कार्यों के लिए किया जाता है. इसलिए प्राकृतिक आपदा के कारण इन कृषि भूमि की फसल नष्ट होने पर उसका सीधा प्रभाव मंदिरों की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है, यह बात ज्ञापन में कही गई है.
पूर्व में मंदिरों की कृषि भूमि को अन्य किसानों की तरह फसल नुकसानभरपाई का लाभ मिलने की बात देवस्थान प्रतिनिधियों ने कही है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अतिवृष्टि, बेमौसम बारिश एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए नुकसान की भरपाई मंदिरों की कृषि भूमि को मिलने में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं. इसके अलावा आधार प्रमाणीकरण जैसी शर्तों के कारण अनेक देवस्थानों की कृषि भूमि नुकसानभरपाई की प्रक्रिया से बाहर रह जाने की समस्या भी ज्ञापन के माध्यम से सामने लाई गई है.
मंदिरों की कृषि आय बंद होने पर पूजा-अर्चना, धार्मिक उत्सव, मंदिर रखरखाव, पुजारी एवं सेवेकरी के मानधन तथा सामाजिक एवं जनोपयोगी कार्यों पर आर्थिक प्रभाव पड़ता है. इसलिए मंदिरों की कृषि भूमि का नुकसान केवल संस्था का आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि धार्मिक एवं सामाजिक व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव भी है, यह बात ज्ञापन में कही गई है.

प्रमुख मांगें

1. मंदिर एवं देवस्थानों के स्वामित्व वाली कृषि भूमि को किसानों की तरह फसल नुकसानभरपाई का लाभ दिया जाए.
2. आधार प्रमाणीकरण जैसी शर्तों के कारण मंदिरों की कृषि भूमि नुकसानभरपाई से वंचित न रहे, इसके लिए स्वतंत्र वैकल्पिक व्यवस्था की जाए.
3. प्राकृतिक आपदा के कारण मंदिरों की कृषि भूमि में हुए नुकसान का पंचनामा कर नियमानुसार नुकसानभरपाई मंजूर की जाए.
4. देवस्थान ट्रस्ट एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच इस विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित कर नुकसानभरपाई के नियमों के संबंध में मार्गदर्शन किया जाए.
5. मंदिरों की कृषि भूमि के संबंध में जिला स्तर पर स्पष्ट मार्गदर्शक निर्देश जारी कर पात्र देवस्थानों को शासन की कृषि एवं आपदा सहायता योजनाओं का लाभ दिलाया जाए.
इस ज्ञापन पर निलेश टवलारे – महाराष्ट्र देवस्थान समिति, कैलाश कुमार पनपालिया – अध्यक्ष, श्री नागेश्वर महादेव संस्थान धामंत्री, ओमप्रकाश परताणी – अध्यक्ष, महारुद्र मारुति संस्थान जहागीरपुर, धनराज वेलणकर – अध्यक्ष, रघुनाथ महाराज संस्थान टाकरखेड़, श्रीकृष्ण माहोरे – रुख्मिणी विदर्भ पीठ, कोंडण्यपुर, गणेश पाटील – तलेगांव ठाकुर, श्यामकुमार गेडाम – तलेगांव ठाकुर तथा अशोकराव झाडे – लोणी, तहसील वरुड आदि के हस्ताक्षर हैं.

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