डीजल महंगा होने से रोज 70 लाख का अतिरिक्त बोझ
एसटी महामंडल पर संकट, प्रशासन परेशान कैसे निकाला जाए बाहर

मुंबई/दि.29- मुंबई पहले इंधन पर एसटी का वार्षिक खर्च करीब 3, 400 करोड रूपए था, परंतु लगातार बढती कीमतों से आर्थिक दबाव और बढ गया है. पहले से ही करीब 12000 करोड रूपए के संचयी घाटे से जूझ रही एसटी चिंताओं से वृध्दि हो गई है.
एसटी परिवहन नियम की डीजल खरीद दर से प्रति लीटर 6.35 रूपए की वृध्दि होने से सेवा पर रोजाना करीब 70 लाख रूपए के अतिरिक्त आर्थिक बोझ पडेगा. ऐसे में एसटी जैसी जनवाहिनी को बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है. यह अपील महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस ेके महासचिव श्रीरंग बरगे ने की. शहर में एसटी कर्मियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे बरगे ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि एसटी की वित्तीय स्थिति पहले से ही गंभीर बनी हुई है. अप्रैल महीने में ही निगम की करीब 76 करोड 47 लाख रूपए का नुकसान हुआ है. बकाया 6 हजार करोड रूपए से अधिक बरगे ने बताया कि भविष्य निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी, कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता, बढा हुआ मकान किराया भत्ता, वार्षिक वेतन वृध्दि का अंतर, आपूर्तिकर्ताओं के बकाया ईंधन भुगतान सहित करीब 6000 करोड रूपए की वैधानिक देनदारियां लंबित हैं. उनका कहना रहा कि राज्य के विकास में अहम भ्ाूमिका निभाने वाली एसटी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के लिए मुख्य परिवहन साधन मानी जाती है. उसे खस्ता हालत से बचाने के लिए नागरिक आगे आएं.
* सामूहिक प्रयासों से बचाएं ईंधन
10 फीसदी मौसमी किराया वृध्दि समाप्त होने के बाद यह घाटा और बढ सकता है. प्रतिदिन का नुकसान 5 करोड रूपए तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. एसटी निगम को रोजाना औसतन 10 लाख 87000 लीटर डीजल की जरूरत पडती है व अब उसकी खरीद दर बढकर करीब 96 रूपए प्रति लीटर हो गई है. ऐसे में 1 जून को 78 वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही एसटी सेवा के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है.





