व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुडे मामलों में प्रशासन को दिखानी होगी तत्परता : हाईकोर्ट
डिविजनल कमिश्नर को दिए आदेश, तीन सप्ताह में करें निर्णय

अमरावती /दि.8– नागपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश स्पष्ट किया है. जब किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो रही हो, तब संंबंधित मामले को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है. हाईकोर्ट ने अमरावती संभागीय आयुक्त को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की अपील तथा उसके साथ दायर स्टे आवेदन पर तीन सप्ताह के भीतर हर स्थिति में शीर्घ निर्णय लिया जाए.
मामले में अकोला निवासी याचिकाकर्ता को तीन जिलों-अकोला, वाशिम और अमरावती से एक वर्ष के लिए निष्कासित किया गया था. उक्त आदेश के विरूध्द याचिकाकर्ता ने संभागीय आयुक्त, अमरावती में अपील के साथ ‘स्टे’ आवेदन भी प्रस्तुत किया था, लेकिन कई समय से उस पर कोई सुनवाई या निर्णय नहीं हो रहा था. याचिकाकर्ता ने प्रशासन के इस रवैये को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि याचिकाकर्ता को तीन जिलों से निष्कासित किया गया था और उसकी लिबर्टी प्रभावित हो रही थी. यह आदेश इस व्यापक सिध्दांत की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है कि न्याय केवल सही निर्णय देने का नाम नहीं है, बल्कि जहां स्वतंत्रता दांव पर लगी हो, वहां निर्णय समय पर होना भी उतना महत्वपूर्ण है. खासतौर पर जहां किसी व्यक्ति को अपने निवास, व्यवसाय और सामान्य जीवन से दूर रहने का आदेश दिया गया हो. याचिकाकर्ता की ओर से एड. मिर्जा परवेज ने पैरवी की इनका सहयोग एड. सचिन वानखेडे ने किया.





