भ्रष्टाचारियों के कर्दनकाल , अब देहदान के प्रणेता संतोष शर्मा

यही पशु-प्रवृत्ति है कि, आप आप ही चरे. वही मनुष्य के लिए मरे. महान साहित्यकार मैथिलीशरण गुप्त द्बारा रचित पंक्तियों को देहदान के प्रणेता संतोष शर्मा ने चरितार्थ कर दिखाया है. उन्होंने अपना सामाजिक दायित्व निभाते हुए भ्रष्ट अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकडवाने में समाज और सरकार दोनो को सहयोग देने के लिये हमेशा तत्पर रहने वाले वर्तमान में देहदान के लिए लोगों को प्रेरित कर जनजागरण कार्य में लगे है. 2 सितंबर 2026 को 72 वा जन्म दिन है.
संतोष शर्मा ने देहदान के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है. 1990 के दशक में रिश्वतखोर अधिकारियों को पकडवाने में सरकार व समाज की मदत की है. 90 के दशक में 2 सिविल सर्जन, यवतमाल के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश व लिपीक रंगेहाथ पकडवाया. एमएसीबी के कनिष्ठ अभियंता, मनपा के वरिष्ठ लिपीक, 2 पुलिस उपनिरीक्षक ,सार्वजनिक लोकनिर्माण विभाग के कर्मचारी, क्रीडा अधिकारी, कृषी उत्पन्न बाजार समिति के सचिव, जी.आर.पी. बडनेरा के पुलिस कर्मी को रंगेहाथ रिश्वत लेते पकडवाया. सामाजिक चेतना के इस अभियान के बाद देर रात अभियान को समर्पित हो गए.
आमतौर पर लोग अभियान छेडते है लेकिन स्वयं पहल नही करते. संतोष शर्माने देहदान की पहल स्वयं से की है. अपने 61 वे जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने देहदान का पी.डी.एम.सी. में संकल्प पत्र दे कर जनसामान्य को देहदान के लिए प्रेरित करना प्रारंभ किया.उनसे प्रेरित होकर अब तक 9 लोगो ने देहदान संकल्प किया है. मुख्य रूप से नारायण सोनी, मिना सोनी, विजय गुप्ता, मंगला गुप्ता, नंदकिशोर मिश्रा, शरद तायडे, कमलाकर चिखलकर, पप्पु शर्मा, महिलाओं में शांती यादव देहदान में शामिल है. अपने देहदान के संकल्प के बारे में संतोष शर्मा का कहना है स्वर्ग और मोक्ष से बढकर नश्वर शरीर यदी किसी के काम आए यही मेरा लक्ष है. ऐसे उन्नत विचारवाले संतोष शर्मा को उनके 72 वे जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
मित्र परीवार संतोष शर्मा





