सीजेपी के आंदोलन का संसद से लेकर सडक तक सियासी संग्राम

छात्रों की पिटाई पर संसद में हंगामा, काले कपडे पहनकर पहुंचे विपक्षी नेता

* दिल्ली हायकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इन्कार
* दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशन किए गए बंद, दिल्ली में सुरक्षा अलर्ट
* बंदोबस्त हेतु बंगाल से 2 हजार सीआरपीएफ जवान बुलाए गए
* राष्ट्रीय राजधानी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस व सुरक्षा बलों की तैनाती
* जंतर-मंतर पर अब भी हजारों प्रदर्शनकारी डटे हुए, सरकार ने फिर बढ़ाया संवाद का हाथ
* कॉकरोच पार्टी की दो टूक-सरकार को बात करनी है तो यहीं आए
* कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा के विपक्षी नेता खड़गे ने पीएम मोदी का मांगा इस्तीफा
नई दिल्ली /दि.22- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन बुधवार को 33 वें दिन भी जारी रहा. राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी, संसद में विपक्ष के तीखे विरोध, दिल्ली पुलिस की सख्ती, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार तथा केंद्र सरकार की ओर से बातचीत की नई पेशकश ने पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है. आंदोलन के कारण दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है. पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी में अतिरिक्त बल तैनात किया है. सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल से लगभग दो हजार सीआरपीएफ जवानों को एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया गया है. सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन अस्थायी रूप से बंद किए गए हैं.
बुधवार सुबह से जंतर-मंतर पर देशभर से पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारी जुटे रहे. प्रदर्शन स्थल पर संविधान की प्रति, महात्मा गांधी का चरखा, धार्मिक ग्रंथों तथा विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से आंदोलन को व्यापक सामाजिक स्वरूप देने की कोशिश दिखाई दी. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने पुष्टि की कि केंद्र सरकार ने दूसरी बार बातचीत का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी की कोर कमेटी से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा कि सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि देशभर से लोग भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री भेजकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं. आंदोलन में उन लोगों की भी बड़ी संख्या शामिल है जो 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुके हैं.
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच अब तक कोई औपचारिक सहमति नहीं बन पाई है. प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द संवाद की पहल नहीं हुई तो यह विवाद और अधिक गहरा सकता है. फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या नहीं.
* राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच बुधवार को राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई. जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी संगठन की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि सरकार बातचीत करना चाहती है तो उसे प्रदर्शन स्थल पर आकर वार्ता करनी होगी. वहीं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पहले इस्तीफा दें, उसके बाद सदन में चर्चा हो सकती है.
* जंतर-मंतर छोड़ने को तैयार नहीं प्रदर्शनकारी
आंदोलनकारी संगठन, जिसे राजनीतिक हलकों में कॉकरोच पार्टी के नाम से संबोधित किया जा रहा है, ने कहा कि हजारों लोग अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए हैं और वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे. संगठन के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो उसे प्रतिनिधियों को बुलाने के बजाय सीधे प्रदर्शन स्थल पर आकर बातचीत करनी चाहिए. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है.
* अभिजीत दिपके ने वांगचुक से अनशन छोडने की अपील की
इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहना चाहिए, लेकिन लंबे अनशन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. दिपके ने सभी पक्षों से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का आग्रह किया.
* खडगे बोले – पहले मोदी इस्तीफा दे, फिर बात होगी
आंदोलन का असर संसद के मानसून सत्र में भी देखने को मिला. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उस पर सरकार जवाब देने से बच रही है. खड़गे ने सदन में कहा कि यदि सरकार पारदर्शी है तो उसे जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए. उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पहले इस्तीफा दें, उसके बाद इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जा सकती है.
* संसद मार्च की हिंसा पर 10 एफआईआर
दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर विभिन्न थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की हैं. पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रैपिड एक्शन फोर्स और अन्य सुरक्षा बलों पर हमला किया, पथराव किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तथा सरकारी कार्य में बाधा डाली. पुलिस के अनुसार झड़पों में सौ से अधिक पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए थे. दूसरी ओर आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया.
* सोनम वांगचुक से मिले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह
आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा बने सोनम वांगचुक पिछले 28 जून से अनशन पर हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात मेदांता अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की. इस मुलाकात को सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


* हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं
– सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस अत्याचार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस कार्रवाई के वीडियो और छात्रों की चोटों का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के पास वीडियो देखने का समय नहीं है और मामले को तत्काल सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता. याचिकाकर्ता ने छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट का मुद्दा उठाया, लेकिन अदालत ने मामले पर तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इसी प्रकार की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि न्यायालय को राजनीतिक विवादों में अनावश्यक रूप से नहीं घसीटना चाहिए. हालांकि कानूनी लड़ाई जारी रहने की संभावना बनी हुई है और आंदोलनकारी पक्ष भविष्य में विस्तृत सुनवाई की मांग कर सकता है.
* सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जताई चिंता
इस बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है. एसोसिएशन ने कहा कि यदि निर्दोष छात्रों पर बल प्रयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. बार एसोसिएशन के अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार संरक्षित है और किसी भी प्रकार की कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए.

                                                                                                                                                * मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटिल भी पहुंचे जंतर-मंतर
– बोले- विद्यार्थियों पर फिर हाथ उठाया तो महाराष्ट्र में घूमने नहीं देंगे
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में पहुंचे मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटील ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से किसी भी परिस्थिति में आंदोलन स्थल न छोड़ने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि भविष्य में छात्रों पर दोबारा बल प्रयोग किया गया तो महाराष्ट्र में भाजपा नेताओं का विरोध किया जाएगा. बुधवार को जंतर-मंतर पहुंचकर मनोज जरांगे पाटील ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके और अन्य छात्र नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों को संबोधित किया और उनके संघर्ष को समर्थन देने का भरोसा दिया.
भाषण के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद गैर-मराठी छात्रों ने जरांगे पाटील से हिंदी में बोलने का आग्रह किया. हालांकि, अभिजीत दीपके उनके मराठी भाषण का हिंदी में अनुवाद कर रहे थे. इसके बावजूद जब छात्रों ने हिंदी में बोलने की मांग की तो जरांगे ने अपने अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, मुझे हिंदी नहीं आती, यही समस्या है. लेकिन अगर मैं हिंदी बोलने लगा तो आप अपनी हिंदी ही भूल जाएंगे. उनके इस बयान पर मंच और सभा स्थल पर मौजूद छात्रों के बीच ठहाके गूंज उठे.
मनोज जरांगे ने छात्रों को आंदोलन जारी रखने की सलाह देते हुए कहा कि जंतर-मंतर छोड़ना आंदोलन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. उन्होंने कहा, आप लोग किसी भी हालत में यह जगह मत छोड़िए. एक बार यहां से हट गए तो सरकार आंदोलन को खत्म कर देगी. पूरा देश आपके साथ खड़ा है.
जरांगे पाटील ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चों के साथ अन्याय कर रही है. उन्होंने कहा, मैं यहां विद्यार्थियों को न्याय दिलाने के लिए आया हूं. यह सरकार बार-बार गरीबों के बच्चों पर अन्याय करती है. अगर आगे छात्रों पर हाथ उठाया गया तो महाराष्ट्र में इनके घूमने पर रोक लगाने का आंदोलन खड़ा करेंगे और इनका अहंकार खत्म किए बिना शांत नहीं बैठेंगे.
अपने संबोधन में जरांगे पाटील ने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान अंतरवाली सराटी में हुई पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, हमने भी अंतरवाली सराटी में आंदोलन किया था. वहां गरीबों के बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और लड़कियों पर पुलिस ने प्राणघातक हमला किया था. हम पर गोलियां चलाई गई थीं. इसलिए मैं छात्रों का दर्द समझ सकता हूं.


* कॉकरोच पार्टी समर्थकों की पिटाई पर संसद में हंगामा
– अखिलेश बोले- बेटियों के कपड़े फाड़े, ये अधिकार किसने दिया
– राहुल गांधी सहित सभी विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर पहुंचे सदन में
संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को विपक्ष ने कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर हंगामा किया. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में पूछा कि पुलिस को बेटियों के कपड़े फाड़ने का अधिकार किसने दिया? लोकसभा में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष की मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार पिछले तीन दिनों से लगातार छएएढ पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा की पेशकश कर रही है.
लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे. विपक्षी पार्टियां 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध कर रहा है. हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होने के एक मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई. दोपहर 12 बजे सदन दोबारा शुरू हुआ, लेकिन करीब 5 मिनट बाद फिर से दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा. राज्यसभा की कार्यवाही भी 2 बजे तक स्थगित कर दी गई.


* पीएम मोदी से मिले शरद पवार, बेटी सुप्रिया सुले भी साथ थीं
– एक दिन पहले सीजेपी चीफ दीपके से मिले थे
इसी बीच आज सुबह राकांपा (शरद पवार गुट) के मुखिया व सांसद शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस मौके पर शरद पवार की सुपुत्री व सांसद सुप्रिया सुले भी उनके साथ रहीं. यह मुलाकात संसद भवन में हुई, जहां पर पीएम मोदी ने राकांपा सुप्रीमो शरद पवार का हाथ थामा और उन्हें सहारा देकर लाए. इस समय पीएम मोदी व राकांपा सुप्रीमो शरद पवार के बीच आत्मीय मुलाकात हुई. इस दौरान शरद पवार ने पीएम मोदी को एक पत्र भी सौंपा. हालांकि दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, अभी इसका ब्योरा सामने नहीं आया है. ज्ञात रहे कि, एक दिन पहले ही शरद पवार जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में पहुंचे थे. उन्होंने सीजेपी के मुखिया अभिजीत दिपके से मुलाकात की थी. वहीं अब शरद पवार की पीएम मोदी से मुलाकात ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है.
मोदी और पवार के बीच रिश्ते निजी तौर पर बेहद सौहार्दपूर्ण और आदरपूर्ण हैं. हालांकि चुनावी राजनीति के मंच पर दोनों एक-दूसरे पर तीखे हमले करने से नहीं चूकते. पीएम मोदी ने 2015 में बारामती के दौरे के दौरान सार्वजनिक रूप से शरद पवार के लंबे राजनीतिक अनुभव की प्रशंसा की थी. उन्होंने कहा था कि पवार ने राजनीति के शुरुआती दिनों में उनका हाथ पकड़कर चलना सिखाया था. राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मोदी सरकार ने 2017 में शरद पवार को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा था. शरद पवार देश के उन चुनिंदा विपक्षी नेताओं में गिने जाते हैं, जिनका प्रधानमंत्री से सीधा संपर्क है. वे राष्ट्रीय मुद्दों या महाराष्ट्र के प्रशासनिक संकटों पर अक्सर पीएम मोदी से वन-टू-वन मुलाकात करते हैं.

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