परिवार के पांच लोगों की जहर देकर हत्या करनेवाली मामी को जमानत

ढाई वर्ष पहले उजागर हुआ था बहुचर्चित महागांव हत्याकांड

* कुंभारे परिवार के पांच सदस्यों को भोजन में दिया गया था ‘थैलियम’
* परिवार की बहु संघमित्रा व मामी रोजा रामटेके ने पांच लोगों को मौत के दिन सुलाया था
गढचिरोली/दि.2- किसी समय अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बडे- बडे नेताओं की हत्या में प्रयुक्त हो चुके बेहद दुर्लभ व घातक ‘थैलियम’ नामक जहर का प्रयोग करते हुए गढचिरोली जिले के महागांव में कुंभारे परिवार के पांच सदस्यों की जान लेनेवाले बहुचर्चित महागांव हत्याकांड मामले की दूसरी आरोपी रोजा रामटेके को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने आखिरकार जमानत देना मंजूर किया हैं. इस समय अदालत का कहना रहा कि भले ही अपराध की गंभीरता कितनी ही अधिक क्यों ना हो लेकिन यदि मुकदमा धिमी गति से चल रहा है तो आरोपी को अनिश्चित समय के लिए जेल में बंद नहीं रखा जा सकता.
बता दें कि ढाई वर्ष पहले महागांव में कुंभारे परिवार की बहु संघमित्रा और मामी रोजा रामटेके ने परिवार के पांच सदस्यों की भोजन व पानी में थैलियम जहर मिलाकर देते हुए हत्या कर दी थी. जिसमें पहले कुंभारे पति-पत्नी फिर उनकी विवाहित बेटी, मौसी और बेटे की मौत हो गई थी. इस सामुहिक हत्याकांड के चलते पूरे महाराष्ट्र में जबरदस्त हडकंप व्याप्त हो गया था. ज्ञात रहे कि थैलियम को धिमा जहर यानी स्लो पॉइजन के तौर पर जाना जाता हैं. यदि किसी व्यक्ति पर इस जहर का प्रयोग किया जाए तो उसक पता लगाना वैद्यकिय दृष्टि से भी बेहद कठिन माना जाता हैं. लेकिन इसके बावजूद तत्कालीन उपविभागीय पुलिस अधिकारी डॉ. सुदर्शन राठोड ने बडी चतुराई के साथ मामले की जांच करते हुए इस घटना का पर्दाफाश किया था तथा कुंभारे परिवार की बहु संघमित्रा कुंभारे और मामी रोजा रामटेके पर अपराधिक मिली भगत करते हुए पांच लोगों की हत्या करने का आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया था. साथ ही इन दोनों को सहयोग देने के मामले में और भी तीन लोग पकडे गए थे. जिसमें से हत्याकांड केे प्रमुख आरोपी संघमित्रा कुंभारे को छोडकर अन्य सभी लोगों को जमानत मिल चुकी है.
ज्ञात रहे कि रोजा रामटेके ने इससे पहले भी अहेरी स्थित जिला व सत्र न्यायालय में दो बार जमानत हेतु आवेदन किया था. जिसे अहेरी के अदालत में खारिज कर दिया था. पश्चात सन 2024 में हाईकोर्ट ने भी रोजा रामटेके के आवेदन को खारिज किया था. परंतु ढाई वर्ष से अधिक समय बित जाने के बावजूद मामले की सुनवाई सुस्त रफ्तार से जारी रहने के चलते रोजा रामटेके ने एक बार फिर हाईकोर्ट में जमानत मिलने हेतु गुहार लगाई. जिसकी याचिका पर 30 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि त्वरित न्याय मिलना प्रत्येक कैदी का मुलभूत अधिकार है. इस मुकदमें में करीब 48 गवाहे और जिस गति से फिलहाल कामकाज चल रहा है उसे देखते हुए मुकदमें की सुनवाई पूरी होने में कई वर्षों का समय लग सकता है. ऐसे में केवल अपराधिक गंभीरता पर आधारित आरोपी को अनिच्छीत काल के लिए कारावास में रखना न्याय संगत नहीं रहेगा. ऐसा महत्वपूर्ण निरीक्षण दर्ज कराते हुए न्या. महेंद्र निर्लिकर ने बहेद कडे नियमों व शर्तों के साथ रोजा रामटेके ेको जमानत देना मंजूर किया. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एड. चौके तथा आरोपी रोजा रामटेके की ओर से एड. कुलदिप महल्ले व एड. बोधी रामटेके ने पैरवी की. इस मामले में यद्यपि मुख्य आरोपी संघमित्रा कुंभारे के अलावा अब अन्य सभी आरोपियों को जमानत मिल गई हैं. परंतु मामले से जुडी अन्य सभी कानुनी प्रक्रिया व मुकदमें की अंतिम सुनवाई जिला न्यायालय में ही जारी रहेगी.

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