विधान परिषद चुनाव में नया राजनीतिक मोड़
परिवर्तन पैनल से मिले चंद्रशेखर बावनकुले

नागपुर /दि.13- विधान परिषद चुनाव की पृष्ठभूमि में नागपुर जिले की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिला है. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के समर्थन से बुटीबोरी नगर परिषद में सत्ता हासिल करने वाले परिवर्तन पैनल के पदाधिकारियों के साथ राज्य के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की बैठक ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है.
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विधान परिषद चुनाव में भाजपा के पास जीत के लिए आवश्यक संख्याबल मौजूद है. इसके बावजूद पार्टी मताधिक्य बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों से संपर्क साध रही है. इसी रणनीति के तहत बुटीबोरी के परिवर्तन पैनल के साथ बढ़ता संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेष बात यह है कि लगभग छह महीने पहले हुए नगर परिषद चुनाव में इसी पैनल ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया था. ऐसे में अब दोनों पक्षों के बीच बढ़ती नजदीकियां राजनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही हैं. गुरुवार को नगर परिषद के सभापति अमजद शेख के निवास पर आयोजित बैठक में पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले उपस्थित रहे. बैठक में विधायक समीर मेघे, डॉ. राजीव पोतदार, नगराध्यक्ष सुमित मेंढे, उपाध्यक्ष आकाश वानखेडे, पूर्व नगराध्यक्ष बबलू गौतम, नगरसेवक समीर बोरकुटे, नगरसेविका करिश्मा भुमरकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया.
हालांकि बैठक में हुई चर्चा का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसे आगामी विधान परिषद चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. बुटीबोरी नगर परिषद चुनाव में परिवर्तन पैनल ने 21 में से 17 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता प्राप्त की थी. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के समर्थन से गठित इस पैनल ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा के खिलाफ मजबूत माहौल बनाया था. इसी कारण अब यह पैनल केवल बुटीबोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जिले के व्यापक राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाली ताकत के रूप में देखा जा रहा है. भाजपा विरोधी भूमिका निभाकर सत्ता में आए परिवर्तन पैनल से अब भाजपा को समर्थन मिलने की संभावनाओं की चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बावनकुले और परिवर्तन पैनल के नेताओं की मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को नया आधार दे दिया है. विधान परिषद चुनाव के मद्देनजर इस घटनाक्रम को जिले की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है. आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजरें इस मुद्दे पर टिकी रहेंगी.





