मांगें पूरी नहीं हुईं तो न्यायालयीन कर्मचारी नहीं मनाएंगे दिवाली
5 नवंबर से आमरण अनशन का ऐलान

नाशिक/दि.16– महाराष्ट्र राज्य न्यायालयीन कर्मचारी महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि वर्षों से लंबित मांगों पर सरकार और उच्च न्यायालय प्रशासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो राज्यभर के न्यायालयीन कर्मचारी इस वर्ष दिवाली नहीं मनाएंगे. साथ ही 5 नवंबर से नाशिक जिलाधिकारी कार्यालय के सामने सेवानिवृत्त कर्मचारी आमरण अनशन पर बैठेंगे, जबकि अन्य जिलों में सेवानिवृत्त कर्मचारी क्रमिक अनशन करेंगे.
महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष दिगंबर निकम ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि न्यायालयीन कर्मचारी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के बावजूद उनकी वेतनमान, पदोन्नति, सेवा नियम और अन्य प्रशासनिक मांगों की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है. उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2009 में वेतन और सेवा सुविधाओं को लेकर आवश्यक निर्देश दिए थे, लेकिन महाराष्ट्र में उनका प्रभावी क्रियान्वयन अब तक नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि न्यायालयीन कर्मचारी मामलों का पंजीकरण, दस्तावेजों का प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का संचालन और न्यायालय के अंतिम आदेशों की प्रतियां तैयार करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं. हाल ही में एक चर्चित बालिका अत्याचार मामले का मात्र 45 दिनों में फैसला होने पर न्यायालय ने कर्मचारियों के कार्य की सराहना भी की थी.
महासंघ ने सरकार और उच्च न्यायालय के समक्ष 10 प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें सभी कर्मचारियों को समान वेतन और वित्तीय लाभ, नियमित पदोन्नति, न्यायालय प्रबंधक पदों के सेवा नियम लागू करना, पेंशन योजना, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन, नई पद संरचना, रिक्त पदों पर भर्ती, बढ़ते कार्यभार को कम करना तथा स्वतंत्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना शामिल है. दिगंबर निकम ने कहा कि इन मांगों को लेकर कई वर्षों से सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष लगातार प्रयास किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ. इसलिए आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचा है. उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर न्यायालयीन कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का समाधान करे.





