दीक्षाभूमि के विकास के लिए बनेगा नया मास्टर प्लान

अब केवल मूल परिसर में होंगे विकास कार्य, विवादों के बाद बदला गया विकास मॉडल

* नागपुर की ऐतिहासिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की तैयारी
नागपुर/दि.29- देश और दुनिया में बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाने वाली दीक्षाभूमि के विकास को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने नई पहल शुरू की है. पूर्व में प्रस्तावित विकास योजना को लेकर हुए विवाद और विरोध के बाद अब दीक्षाभूमि के लिए नया संशोधित मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. इसके लिए नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) द्वारा नए वास्तुविशारद (आर्किटेक्ट) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
बता दे कि, दीक्षाभूमि वह ऐतिहासिक स्थल है जहां 14 अक्टूबर 1956 को भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर ने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की थी. हर वर्ष धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. इसी कारण राज्य सरकार ने इस स्थल को विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित करने का निर्णय लिया है.
* 200 करोड़ रुपये की परियोजना
दीक्षाभूमि विकास परियोजना के लिए राज्य सरकार ने लगभग 200 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिनमें से 110 करोड़ रुपये एनएमआरडीए को हस्तांतरित किए जा चुके हैं. पहले तैयार किए गए विकास आराखड़े में आधुनिक पाथवे, आकर्षक लैंडस्केपिंग, भव्य प्रवेश द्वार, अत्याधुनिक प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा दीवार तथा डॉ. आंबेडकर और धम्मचक्र प्रवर्तन के इतिहास को दर्शाने वाला ‘साउंड एंड लाइट शो’ प्रस्तावित था.
* भूमिगत पार्किंग को लेकर हुआ था विरोध
पूर्व योजना में दीक्षाभूमि से सटी कृषि विभाग की जमीन को भी शामिल किया गया था तथा भूमिगत वाहन पार्किंग का प्रस्ताव रखा गया था. हालांकि इस पार्किंग को मेट्रो परियोजना से जोड़कर देखा गया, जिसके चलते बौद्ध समाज और विभिन्न संगठनों ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किए. आंदोलन और तनावपूर्ण घटनाओं के बाद विकास कार्य रोक दिए गए थे.
* अब केवल दीक्षाभूमि परिसर में होगा विकास
सूत्रों के अनुसार, नए मास्टर प्लान में कृषि विभाग की अतिरिक्त जमीन को शामिल नहीं किया जाएगा. विकास कार्य केवल दीक्षाभूमि के मौजूदा परिसर तक सीमित रहेंगे. इससे पहले उठे विवादों को टालने और सामाजिक सहमति बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
* सहमति के आधार पर बनेगा नया प्रारूप
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पहले ही संकेत दे चुके हैं कि दीक्षाभूमि के विकास का नया खाका जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों की सहमति से तैयार किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को अक्षुण्ण रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
* विश्वस्तरीय स्वरूप देने की तैयारी
सरकार की योजना दीक्षाभूमि को अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की है. प्रस्तावित सुविधाओं में बेहतर यात्री प्रबंधन, सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, डिजिटल प्रस्तुतीकरण तथा श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाएं शामिल हो सकती हैं. नया वास्तुविशारद नियुक्त होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसके आधार पर विकास कार्यों को गति मिलेगी.
राज्य सरकार के इस निर्णय से दीक्षाभूमि विकास परियोजना को नया जीवन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नया मास्टर प्लान कब अंतिम रूप लेता है और बहुप्रतीक्षित विकास कार्य जमीन पर कब शुरू होते हैं.

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