तीन बेटियां होने पर पत्नी की हत्या
नागपुर हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार

नागपुर/दि.7– लगातार तीन बेटियों के जन्म से नाराज होकर पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने वाले आरोपी को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने वाशिम सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी. खंडपीठ की न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता ने यह फैसला सुनाया. मामला वाशिम जिले के शिरपुर का है.
अभियोजन के मुताबिक आरोपी धनंजय प्रल्हाद बोडखे (34) की शादी वर्ष 2012 में सुनीता उर्फ रूपाली से हुई थी. दंपति की लगातार तीन बेटियां हुईं, जिससे आरोपी नाराज रहता था. वह शराब के नशे में पत्नी के साथ अक्सर मारपीट करता था. 24 मई 2018 की शाम आरोपी ने किराए के मकान में पहले पत्नी को लात-घूंसों से पीटा. इसके बाद शोर दबाने के लिए टीवी का वॉल्यूम तेज कर दिया और बच्चों की झूले की रस्सी से पत्नी का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी. हत्या के बाद आरोपी तीनों मासूम बेटियों को कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगाकर फरार हो गया. अगले दिन पुलिस ने उसे एक शराब की दुकान के पास से गिरफ्तार कर लिया. वाशिम सत्र न्यायालय ने 8 दिसंबर 2021 को आरोपी को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद, 10 हजार रुपये जुर्माना तथा जुर्माना न भरने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई थी. आरोपी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध ठोस सबूतों के आधार पर उसकी अपील खारिज कर दी.
* चार वर्षीय बेटी बनी अहम गवाह
मामले में आरोपी की चार वर्षीय बेटी प्रत्यक्षदर्शी गवाह बनी. अदालत ने उसकी गवाही को विश्वसनीय माना. बच्ची ने बताया कि उसके पिता ने पहले उसकी मां को लात मारी, फिर टीवी की आवाज तेज कर दी और झूले की रस्सी से गला घोंट दिया. इसके बाद तीनों बहनों को कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगाकर फरार हो गया. अदालत ने इस गवाही को फैसले का महत्वपूर्ण आधार माना.




