एक दिन के विधायक को भी 50 हजार पेन्शन कैसे?
हाईकोर्ट में जनहित याचिका

* खंडपीठ ने मंजूर की अर्जी, एक माह बाद सुनवाई
नागपुर /दि.13- महाराष्ट्र विधान मंडल का सदस्य बनने की शपथ लेने पश्चात कार्यकाल पूर्ण न करने पर भी आजीवन निवृत्त वेतन दिए जाने के प्रावधान को बंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. चारुदत्त विनायक सहाजे ने यह याचिका दाखिल कर निवृत्ति वेतन अधिनियम 1976 की धारा 3 (1) को असंवैधानिक बताकर रद्द करने की मांग रखी है. बुधवार को न्या. अनिल किशोर और न्या. रजनीश व्यास की खंडपीठ ने याचिका विचारार्थ स्वीकार की. आगामी 23 सितंबर को अगली सुनवाई रखी गई है.
चारुदत्त सहाजे की ओर से एड. तुषार मंडलेकर ने पक्ष प्रस्तुत किया. याचिका में कहा गया कि, विधान मंडल के सदस्य के रुप में शपथ लेते ही वह व्यक्ति पेन्शन पाने का हकदार हो जाते है. इसके लिए कार्यकाल या सदस्य के किसी प्रकार के अंशदान की आवश्यकता नहीं है. जिससे एक दिन सदस्य बने व्यक्ति को भी पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करनेवाले सदस्य जितना अर्थात 50 हजार रुपए मासिक पेन्शन मिलती है. पांच वर्ष से अधिक सेवा रहने पर प्रत्येक वर्ष के लिए 2 हजार रुपए अतिरिक्त निवृत्ति वेतन दिया जाता है. यह प्रावधान विसंगत होने का दावा याचिका में किया गया. यह भी कहा गया कि, संविधान द्वारा दिए गए समान अधिकारों का यह उल्लंघन है.
* प्रति वर्ष 83 करोड खर्च
पूर्व विधायक और परिवार निवृत्ति वेतन धारकों की पेन्शन पर महाराष्ट्र ने प्रति वर्ष लगभग 82 करोड 98 लाख रुपए खर्च किए जाते है. 19 मई 2026 तक प्रदेश के 630 विधानसभा सदस्य, 144 विधान परिषद सदस्य और 596 परिजन का समावेश रहने का दावा याचिकाकर्ता ने किया है. उन्होंने तत्काल यह पेन्शन का प्रावधान पर रोक लगाने की गुहार खंडपीठ से की है.





