‘वर्ल्ड क्लास’ रेलवे स्टेशनों का दावा, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे
बढ़ती यात्री संख्या के बावजूद जीआरपी और आरपीएफ में भारी स्टाफ की कमी

* 25 साल पुराने मंजूर पदों पर चल रही सुरक्षा व्यवस्था, कई पद अब भी रिक्त
नागपुर /दि.14- देशभर में रेलवे स्टेशनों को ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने की दिशा में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशन, अत्याधुनिक भवन, एस्केलेटर, लिफ्ट और स्मार्ट यात्री सुविधाओं का प्रचार किया जा रहा है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब भी उपेक्षित नजर आ रहा है. विदर्भ सहित मध्य भारत के रेलवे नेटवर्क में यात्री संख्या कई गुना बढ़ने के बावजूद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था आज भी लगभग 25 वर्ष पुराने ढांचे पर ही चल रही है.
स्थिति यह है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करने वाली आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) दोनों ही एजेंसियां कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही हैं. कई महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं.
* रेलवे का विस्तार हुआ, लेकिन सुरक्षा बल नहीं बढ़ा
पिछले दो दशकों में रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. नई रेल लाइनें, नए स्टेशन और ट्रेनों की संख्या बढ़ी है. नागपुर जैसे महत्वपूर्ण जंक्शन पर प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है. इसके बावजूद सुरक्षा बलों की स्वीकृत संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई. विशेषज्ञों का कहना है कि जिस समय सुरक्षा बलों के पद स्वीकृत किए गए थे, उस समय रेलवे स्टेशनों की संख्या और यात्री भार आज की तुलना में काफी कम था. अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था उसी पुराने ढांचे पर निर्भर है.
* नागपुर, अजनी और इतवारी का विकास, पर सुरक्षा पर सवाल
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्टेशन पुनर्विकास योजना के तहत नागपुर, अजनी और इतवारी रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है. इन स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है. लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की उपलब्धता नहीं है. रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भव्य भवन और आधुनिक सुविधाएं किसी स्टेशन को विश्वस्तरीय नहीं बनातीं. सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया और अपराध नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं.
* जीआरपी में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी
नागपुर रेल पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं. अधिकारियों के 45 स्वीकृत पदों में से केवल 32 अधिकारी कार्यरत हैं. 13 अधिकारी पद रिक्त हैं. पुलिस उपनिरीक्षक (पीएसआई) के 17 पदों में से 8 पद खाली हैं. एक उपविभागीय पुलिस अधिकारी का पद भी रिक्त है. कर्मचारियों के 584 स्वीकृत पदों में से 19 पद खाली हैं. वर्तमान में केवल 565 कर्मचारी कार्यरत हैं. ऐसे में बढ़ते यात्री दबाव और रेलवे अपराधों की रोकथाम की जिम्मेदारी सीमित स्टाफ पर आ गई है.
* यात्रियों की सुरक्षा पर बढ़ रहा खतरा
स्टाफ की कमी के कारण रेलवे पुलिस को कई बार एक ही समय में अनेक स्टेशनों और ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ती है. इसका असर अपराध नियंत्रण और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता पर पड़ रहा है. रेलवे सूत्रों के अनुसार, मोबाइल चोरी, सामान चोरी, महिलाओं से छेड़छाड़, जेबकतरी और अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए पर्याप्त मानवबल उपलब्ध नहीं है. कई बार शिकायतों के निपटारे में भी देरी होती है.
* 2022 में बना था प्रस्ताव, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में रेलवे पुलिस मुख्यालय मुंबई की ओर से एक शासन निर्णय (जीआर) जारी किया गया था. इसमें रेलवे स्टेशनों और यात्री संख्या के आधार पर आवश्यक पुलिस बल का नया मानक तय करने तथा मानवबल की समीक्षा का प्रस्ताव रखा गया था. हालांकि, चार वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी. न तो नई पदसंख्या स्वीकृत हुई और न ही रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हुई.
* ‘आउटडेटेड’ हो चुका है मौजूदा ढांचा
रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्वीकृत पदसंख्या अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी है. जिस दौर में यह संरचना बनाई गई थी, उस समय न तो इतनी ट्रेनें थीं और न ही यात्रियों का इतना दबाव था. आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं. रेलवे स्टेशनों का विस्तार, बढ़ती यात्री संख्या, डिजिटल टिकटिंग, महिला यात्रियों की बढ़ती भागीदारी और सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियों को देखते हुए जीआरपी और आरपीएफ दोनों के लिए नए सिरे से मानवबल निर्धारण की आवश्यकता है.
* सुरक्षा के बिना ‘वर्ल्ड क्लास’ का दावा अधूरा
रेलवे यात्रियों का मानना है कि यदि आधुनिक स्टेशन निर्माण के साथ सुरक्षा व्यवस्था को समान महत्व नहीं दिया गया, तो ‘वर्ल्ड क्लास स्टेशन’ का दावा अधूरा ही रहेगा. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिक्त पदों को तत्काल भरना, नई भर्ती करना और बढ़ती जरूरतों के अनुरूप सुरक्षा बल का विस्तार करना समय की मांग बन गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे का वास्तविक विकास तभी माना जाएगा, जब आधुनिक सुविधाओं के साथ यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा भी मिल सके.





