पर्दा गिर गया, लेकिन अमरावती के रंगमंच पर आज भी जीवित हैं ‘नाना’ की यादें
‘पुरुष’ से लेकर ‘तन-मजोरी’ तक, दमदार अभिनय से जीता था दर्शकों का दिल

कलाकारों ने साझा कीं उनसे जुड़ी यादें
अमरावती/दि.9 – जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से मराठी रंगमंच और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और संवेदनशील व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी. उनके अभिनय ने जहां दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी, वहीं उनकी इंसानियत और सहज व्यवहार ने भी अनेक लोगों को प्रभावित किया. आज भले ही रंगमंच का पर्दा गिर गया हो, लेकिन अमरावती के नाट्यप्रेमियों के दिलों में उनसे जुड़ी यादें अब भी जीवित हैं.
नाना पाटेकर का अमरावती से रंगमंच के माध्यम से पुराना रिश्ता रहा है. वर्ष 1982-83 में उनका चर्चित नाटक ‘पुरुष’ अभिनेत्री रीमा लागू के साथ अमरावती के वनिता समाज में मंचित हुआ था. उस समय अमरावती के अनेक नाट्यप्रेमियों को पहली बार नाना पाटेकर का अभिनय करीब से देखने का अवसर मिला था. अमरावती नाट्य परिषद के अध्यक्ष एड. चंद्रशेखर डोरले भी उस अनुभव को आज तक याद करते हैं. इसके बाद ‘तन-माजोरी’ नाटक के माध्यम से भी अमरावती के दर्शकों को उनकी अभिनय प्रतिभा देखने का अवसर मिला. इन नाटकों ने स्थानीय रंगमंच पर उनकी एक खास छाप छोड़ी, जिसे आज भी नाट्यप्रेमी याद करते हैं.
* ‘जितना कम दोगे, उतना कम होगा’, नाना का वह जवाब आज भी याद है
निर्देशक विशाल तराल ने नाना पाटेकर के साथ जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग साझा किया. उन्होंने बताया कि जब उन्हें नाना पाटेकर के साथ काम करने का अवसर मिला, तब वे निर्माता के रूप में उनसे मिलने पुणे स्थित उनके घर गए थे. बातचीत के दौरान जब नाना से पूछा गया कि वे किसी भूमिका के लिए कितनी फीस लेंगे, तो उन्होंने हंसते हुए सहज अंदाज में जवाब दिया, ‘जितना कम दोगे, उतना कम होगा.’ नाना के इस मजाकिया जवाब से वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े. विशाल तराल के अनुसार, नाना का यह अंदाज और उनके साथ हुई वह बातचीत आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा है. उनके व्यक्तित्व में गंभीरता के साथ हास्यबोध भी था, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता था.
* मूक-बधिर विद्यार्थियों के प्रति भी दिखाया अपनापन
चित्रकार पल्लवी यादगीरे वैद्य ने भी नाना पाटेकर से जुड़ा अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि राज्यस्तरीय मूक-बधिर नाट्य प्रतियोगिता के अवसर पर उन्हें नाना पाटेकर को करीब से देखने और उनके व्यक्तित्व को समझने का अवसर मिला था. पल्लवी के अनुसार, बड़े पर्दे पर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को प्रभावित करने वाले नाना वास्तविक जीवन में बेहद संवेदनशील, सहयोगी और मानवीय दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्ति थे. मूक-बधिर विद्यार्थियों की प्रतिभा को जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ उन्होंने देखा, उससे उनके मन में नाना की छवि और भी गहरी हो गई.
* अभिनय से आगे, इंसानियत की भी छोड़ी छाप
नाना पाटेकर की पहचान केवल एक प्रतिभाशाली अभिनेता तक सीमित नहीं रही. उनके साथ काम करने वाले कलाकार और उनसे मिलने वाले लोग उनके सहज स्वभाव, संवेदनशीलता और दूसरों के प्रति सम्मान को भी याद करते हैं. अमरावती के रंगमंच से जुड़ी उनकी यादें इस बात की गवाह हैं कि एक कलाकार की वास्तविक पहचान केवल उसकी भूमिकाओं से नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में छोड़ी गई छाप से भी होती है. आज उनके निधन से मराठी रंगमंच और सिनेमा जगत में जो रिक्तता पैदा हुई है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा. हालांकि, ‘पुरुष’ और ‘तन-माजोरी’ जैसे नाटकों से जुड़ी स्मृतियां तथा उनके साथ काम करने वालों के अनुभव अमरावती के नाट्यप्रेमियों के बीच लंबे समय तक उनकी यादों को जीवित रखेंगे.
* वह हमारे आदर्श थे
मैंने हमेशा नाना पाटेकर को अपना आदर्श माना है. उनसे मैंने एक कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी बहुत कुछ सीखा है. समाज के प्रति उनका दृष्टिकोण और समाज के लिए हमेशा कुछ करने की उनकी भावना ऐसी है, जिससे हर किसी को प्रेरणा लेनी चाहिए. जब मैं मुंबई में थिएटर करता था, तब नाम फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में उनसे मिलने का अवसर मिला था. उनके बोलने का अंदाज, उनका रहन-सहन और जीवन को देखने का नजरिया बहुत प्रेरणादायी था. आज ऐसा लग रहा है, जैसे एक नटसम्राट हमसे दूर चला गया हो.
– विशाल पिसाट, अभिनेता.
* मन पर गहरी छाप छोडने वाला कलाकार
नाना पाटेकर के निधन की खबर सुनकर मेरा दिल बैठ गया. कुछ कलाकार अपनी अदाकारी के लिए याद किए जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, जो अपनी कला से आगे बढ़कर लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं. नाना पाटेकर उन्हीं में से एक थे. उन्होंने अपनी कई फिल्मों में अभिनय के अलग-अलग रंग दिखाए. उनकी दमदार आवाज, खास अंदाज, संवाद अदायगी और यहां तक कि धीमे स्वर में व्यक्त की गई भावनाएं भी दर्शकों के दिलों में घर कर जाती थीं. फिल्म के उनके कई संवाद आज भी याद हैं और हमेशा याद रहेंगे.
– किरण शरद, अभिनेत्री.
* मेरा सपना अधूरा रहा
नाना पाटेकर सर के साथ कम से कम एक बार काम करना और उनके साथ एक ही फ्रेम में नजर आना मेरा दिली सपना था. लेकिन आज उनके जाने से मेरा यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया. मुझे हमेशा इस बात का अफसोस रहेगा कि मुझे उनसे सीखने का अवसर नहीं मिल पाया. एक कलाकार के रूप में वे हमेशा मेरी प्रेरणा रहेंगे. मैं नाना की हर प्रस्तुति में उनके अभिनय की जीवंतता महसूस करना चाहता था. एक कलाकार के तौर पर उनसे बहुत कुछ सीखने की इच्छा थी, लेकिन अब यह सपना अधूरा ही रह गया. मैं इस महान अभिनेता को हृदय से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.
– वैभव ओगले, अभिनेता.
* नाना के साथ काम करना सौभाग्य
नाना पाटेकर की फिल्में मैं बचपन से देखता आया हूं. ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘यशवंत’ जैसी उनकी कई फिल्मों ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी है. मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे फिल्म में प्रकाश बाबा आमटे के साथ काम करने और नाना पाटेकर को करीब से जानने का अवसर मिला. यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी. आज भी यकीन नहीं हो रहा कि वे हमें छोड़कर चले गए. मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि जब तक हिंदी और मराठी सिनेमा का नाम रहेगा, तब तक नाना पाटेकर का नाम भी सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा.
– प्रवीण प्रभाकर, अभिनेता.





