‘नटसम्राट’ करने वाले कई कलाकारों की मौत हार्ट अटैक से हुई’
खुद ‘नटसम्राट’ नाना पाटेकर ने जताई थी आशंका

नागपुर के जलक्रांति सम्मेलन में साझा किया था अनुभव
नागपुर/दि. 9 – अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ने वाले वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से कला जगत में शोक की लहर है. उनके पुराने साक्षात्कार और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं. इसी बीच नागपुर में आयोजित जलक्रांति सम्मेलन में उनके द्वारा ‘नटसम्राट’ नाटक और उसमें अभिनय करने वाले कलाकारों को लेकर व्यक्त की गई आशंका का वीडियो चर्चा में है. नाना ने कहा था कि इस नाटक की भूमिका इतनी भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण है कि उसे मंच पर निभाने के लिए कलाकार को अपना पूरा अस्तित्व उसमें झोंकना पड़ता है.
कुछ महीने पहले नागपुर में आयोजित जलक्रांति सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, अभिनेता मकरंद अनासपुरे और जलसंवर्धन के क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग उपस्थित थे. इसी मंच से नाना पाटेकर ने अपने अभिनय अनुभव साझा करते हुए बताया था कि उन्होंने ‘नटसम्राट’ नाटक में अभिनय करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था.
* 10, 15 या 25 प्रयोगों के बाद शायद मैं नहीं बचता
नाना पाटेकर ने बताया था कि जब उन्हें ‘नटसम्राट’ नाटक में भूमिका निभाने के लिए कहा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा था कि वह नाटक के बजाय इस विषय पर फिल्म करना पसंद करेंगे. उनके अनुसार, मंच पर हर बार उस किरदार को पूरी भावनात्मक तीव्रता के साथ जीना पड़ता है. उन्होंने आशंका जताई थी कि यदि वह यह नाटक करते, तो संभव है कि 10, 15 या 25 प्रयोगों के बाद ही उनकी मृत्यु हो जाती. इस भूमिका की गहराई और उसके भावनात्मक प्रभाव को समझाते हुए उन्होंने डॉ. श्रीराम लागू, दत्ता भट, चंद्रकांत गोखले और यशवंत दत्त जैसे दिग्गज कलाकारों का उल्लेख किया था.
नाना ने कहा था कि इन कलाकारों ने ‘नटसम्राट’ के किरदार को मंच पर साकार करने के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था. उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया था कि इस नाटक में भूमिका निभाने वाले कई वरिष्ठ कलाकारों की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई.
* विक्रम गोखले के अभिनय की खुलकर की थी प्रशंसा
इसी कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने दिवंगत अभिनेता विक्रम गोखले के अभिनय की भी जमकर सराहना की थी. उन्होंने स्वीकार किया था कि अभिनय के मामले में विक्रम गोखले उनसे कई गुना आगे थे और उन्होंने जिस ऊंचाई को हासिल किया, वहां तक पहुंचना किसी के लिए भी आसान नहीं था. नाना ने अपने चर्चित नाटक ‘पुरुष’ का अनुभव भी साझा किया था. उन्होंने बताया था कि नाटक के मध्यांतर में पर्दा गिरने के बाद पूरा सभागृह इतना शांत हो जाता था कि किसी कुर्सी की आवाज तक सुनाई नहीं देती थी. दर्शक किरदारों और घटनाओं के प्रभाव में पूरी तरह डूब जाते थे.
* किसानों के लिए नाना का जाना व्यक्तिगत क्षति
– नाना के योगदान को याद कर भावुक हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले
नाना पाटेकर के निधन पर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गहरा शोक व्यक्त किया. नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने नाना के साथ पिछले 15 वर्षों के संबंधों को याद किया. उन्होंने कहा कि नाना का जाना केवल फिल्म जगत की क्षति नहीं है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले मराठी लोगों और किसानों-मजदूरों के लिए भी अपूरणीय नुकसान है. बावनकुले के अनुसार, नाना पाटेकर केवल पर्दे के अभिनेता नहीं थे. उन्होंने महाराष्ट्र में सूखे, खेती, पानी और किसानों की समस्याओं के लिए अपना समय और ऊर्जा समर्पित की थी. ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से उन्होंने संकटग्रस्त किसान परिवारों की सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंवर्धन के लिए काम किया.
मंत्री बावनकुले ने बताया कि करीब 15 दिन पहले ही नाना पाटेकर ने ‘मुख्यमंत्री बलिराजा खेत-पाणंद सड़क योजना’ के ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम करने की सहमति दी थी. मौजूदा सूखे की स्थिति में उनके साथ पूरे महाराष्ट्र का दौरा करने की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन उनके अचानक निधन से ये योजनाएं अधूरी रह गईं. नाना पाटेकर ने एक कलाकार के रूप में दर्शकों से मिलने वाले आनंद की तुलना सामाजिक कार्य से करते हुए कहा था कि ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से किसानों के लिए काम करने में भी उन्हें वैसी ही संतुष्टि मिलती है. उनके अभिनय के साथ-साथ समाजसेवा के इस पक्ष को भी लोग लंबे समय तक याद रखेंगे.





