जन्माष्टमी पर सजी शास्त्रीय संगीत की भव्य महफिल
पं. जितेंद्र अभिषेकी के शिष्य प्रदीपराव गवलीकर की अभिजात गायकी ने मोहा मन

अमरावती/दि.8– श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का मनोहारी दर्शन कराने वाली एक भव्य संगीत महफिल का आयोजन स्थानीय श्रीप्रभूरामचंद्र नगर स्थित ‘सूरसावली’ निवास पर रविवार, 6 सितंबर को किया गया. सुर, ताल और भक्ति के अद्भुत संगम से सजी इस संगीतमय शाम में उपस्थित रसिक श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए.
विदर्भ के प्रसिद्ध गायक तथा गानतपस्वी पं. जितेंद्र अभिषेकी के शिष्य श्री श्याम उर्फ प्रदीपराव गवलीकर ने अपनी दमदार और मधुर गायकी से महफिल में चार चांद लगा दिए. उन्होंने राग ‘दिन का कानडा’ में ‘पवन सुत नाम’ बड़े ख्याल से गायन की शुरुआत की. इसके बाद ‘झूम झूम बादरिया बरसो’ छोटा ख्याल प्रस्तुत कर वातावरण को सुरमयी बना दिया. राग ‘श्री’ की बंदिश और द्रुत लय में प्रस्तुत तराने ने श्रोताओं से खूब वाहवाही बटोरी. शास्त्रीय गायन के बाद नाट्यसंगीत की भी मनमोहक प्रस्तुति हुई. गवलीकर ने ‘मानापमान’ नाटक का अजरामर नाट्यगीत ‘रवि मी’ तथा ‘मृच्छकटिक’ नाटक का ‘स्वकर शपथ वचनी वाहिला उगीच का तुवा’ प्रस्तुत कर संगीत रंगभूमि के स्वर्णिम दौर की यादें ताजा कर दीं. जन्माष्टमी के अवसर पर प्रस्तुत ‘ब्रज बसंत न आनंदाचा कंद हरी हा पाहिला’ भक्तिगीत से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया. अंत में ‘अवघे गरजे पंढरपूर’ भैरवी से इस सुरमयी महफिल का भक्तिमय एवं मंगलमय समापन हुआ.
इस संगीतमय प्रस्तुति में संवादिनी पर श्री विजयराव गवलीकर ने भावपूर्ण संगत की, जबकि तबले पर श्री अजय चव्हाण ने शानदार ताल-संगत से प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया. तानपुरे पर श्री अतुल मोहोड़ ने सुरीली संगत की. कार्यक्रम का सुंदर एवं व्यवस्थित आयोजन श्री दिनेश वासुदेवराव राऊत ने किया. कार्यक्रम का प्रभावी और ज्ञानवर्धक संचालन प्रा. सौ. वंदना दिनेश राऊत ने किया. प्रमुख अतिथि के रूप में दरेकर सर एवं चोरडे सर उपस्थित रहे. परिसर के संगीतप्रेमी एवं जागरूक रसिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति के कारण यह शास्त्रीय संगीत महफिल लंबे समय तक स्मरणीय बनी रही.





