सत्ताधारी विधायक के पीए का फोन

नियमों को दरकिनार कर ट्रॉली को समृद्धि महामार्ग पर प्रवेश?

* दुर्गादेवी मूर्ति ले जा रहे पिकअप के भीषण हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत
* टोलकर्मियों ने पहले किया था विरोध, अब पूरे मामले की जांच पर नजर
अमरावती/दि.3- समृद्धि महामार्ग पर दुर्गादेवी की मूर्ति ले जाते समय हुए भीषण हादसे के मामले में एक नया और गंभीर खुलासा सामने आया है. सूत्रों के अनुसार, वाशिम जिले के कारंजा लाड टोल नाके पर ट्रॉली जुड़े वाहन को समृद्धि महामार्ग पर प्रवेश देने का टोल कर्मचारियों ने कथित तौर पर विरोध किया था. हालांकि, दुर्गा मंडल के कार्यकर्ताओं द्वारा एक सत्ताधारी विधायक के पीए से फोन पर संपर्क किए जाने के बाद संबंधित वाहन को आगे जाने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है. अब इस पूरे मामले में नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं.
दरअसल, अमरावती जिले के धामणगांव रेलवे थाना क्षेत्र में समृद्धि महामार्ग पर दुर्गादेवी की ऊंची मूर्ति लेकर जा रहे बोलेरो पिकअप वाहन को पीछे से कंटेनर ने जोरदार टक्कर मार दी थी. इस दर्दनाक हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत, जबकि करीब 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. हादसे के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया.
* टोल नाके पर पहले ही किया गया था विरोध?
जानकारी के मुताबिक दुर्गा मंडल के कार्यकर्ता शेगांव से दुर्गादेवी की ऊंची मूर्ति लेकर वर्धा की ओर जा रहे थे. मूर्ति को एक पिकअप वाहन के साथ ट्रॉली में ले जाया जा रहा था. कारंजा लाड स्थित समृद्धि महामार्ग के टोल नाके पर कर्मचारियों ने ट्रॉली जुड़े वाहन को महामार्ग पर प्रवेश देने पर आपत्ति जताई थी. बताया जा रहा है कि इसके बाद मंडल के कार्यकर्ताओं ने एक सत्ताधारी विधायक के पीए से संपर्क किया. सूत्रों के मुताबिक, पीए ने टोल कर्मचारियों से फोन पर बात कर वाहन को आगे जाने के लिए कहा. इसके बाद संबंधित ट्रॉली को समृद्धि महामार्ग पर प्रवेश दिए जाने की जानकारी सामने आई है. हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है. यदि टोल नाके पर ट्रॉली को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी और बाद में किसी प्रभावशाली व्यक्ति के फोन के बाद वाहन को प्रवेश दिया गया, तो यह गंभीर जांच का विषय बन सकता है.
* नियमों की अनदेखी से बढ़ा खतरा?
समृद्धि महामार्ग पर वाहन सुरक्षा से जुड़े कड़े नियम लागू हैं. विशेष रूप से वाहन के पीछे ट्रॉली जोड़कर चलने वाले वाहनों के प्रवेश को लेकर प्रतिबंध होने की बात सामने आ रही है. ऐसे में यदि नियमों के बावजूद ट्रॉली को महामार्ग पर जाने की अनुमति दी गई थी, तो इस निर्णय के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच किए जाने की मांग उठ रही है. हादसे में सात लोगों की जान जाने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि टोल नाके पर कर्मचारियों ने यदि नियमों का हवाला देकर वाहन रोकने की कोशिश की थी, तो बाद में उसे किसके निर्देश पर छोड़ा गया? इस मामले में संबंधित टोल कर्मचारी, वाहन चालक, मंडल के पदाधिकारी और कथित तौर पर फोन करने वाले व्यक्ति की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
* कैसे हुआ था भीषण हादसा?
जानकारी के मुताबिक दुर्गा माता की ऊंची मूर्ति लेकर बोलेरो पिकअप वाहन शेगांव से वर्धा की ओर जा रहा था. रात करीब एक बजे धामणगांव रेलवे के समीप समृद्धि महामार्ग पर पीछे से आ रहे कंटेनर ने पिकअप वाहन को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भीषण थी कि मूर्ति लेकर जा रहे वाहन में सवार मंडल के कई सदस्य बुरी तरह चपेट में आ गए. हादसे में सात लोगों की मौके पर अथवा उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि करीब 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित यंत्रणा मौके पर पहुंची तथा घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया.
* अब जांच में सामने आएगा सच
हादसे के बाद अब कथित तौर पर विधायक के पीए द्वारा टोल कर्मचारियों को फोन किए जाने की जानकारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है. यदि जांच में यह बात सही साबित होती है कि प्रतिबंधित अथवा नियमों के विपरीत वाहन को किसी के दबाव या निर्देश पर समृद्धि महामार्ग पर प्रवेश दिया गया, तो संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी निश्चित करने की मांग जोर पकड़ सकती है. फिलहाल टोल नाके के सीसीटीवी फुटेज, टोल कर्मचारियों के बयान, वाहन के प्रवेश का रिकॉर्ड, फोन कॉल की जानकारी और हादसे से पहले वाहन को दी गई अनुमति जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी. सात श्रद्धालुओं की मौत के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जांच में नियमों के उल्लंघन और कथित हस्तक्षेप को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं.

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