भारतीय ज्ञान परंपरा की विरासत से विद्यार्थी जुड़े- कुलपति प्रा. कुमुद शर्मा

हिंदी विश्वविद्यालय के रिद्धपुर केंद्र पर महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी व डिजिटल पुस्तकालय का हुआ शुभारंभ

वर्धा /दि.6 – भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीकी के साथ जोड़कर वैश्विक आवश्यकता देखते हुए उसे ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ में शामिल किया गया. भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को विद्यार्थियों में साझा करें जिससे विद्यार्थी देश के वर्तमान से जुड़े और भविष्य की आकांशाओं को पूरा कर सके, यह वक्तव्य महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने बुधवार, 5 अगस्त को विश्वविद्यालय के सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी मराठी भाषा तथा तत्वज्ञान अध्ययन केंद्र, रिद्धपुर में आयोजित ‘महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी’ के उद्घाटन के अवसर पर दिया.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय शिक्षा समागम के तहत महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी मराठी भाषा तथा तत्वज्ञान अध्ययन केंद्र, रिद्धपुर द्वारा 5 अगस्त को ‘महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी’ में उद्घाटक तथा कार्यक्रम की अध्यक्ष के रूप में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा बोल रही थी. उन्होंने अपने वक्तव्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा क्षेत्र का एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया, जो शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन कर रहा है. उन्होंने ने बताया कि विश्वविद्यालय के रिद्धपुर केंद्र पर संचालित पायलट परियोजना का कार्य भी भारतीय ज्ञान परंपरा के कार्य से संबधित है, जिसके माध्यम से सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की ज्ञान संपदा को वर्तमान पीढ़ी तक लाने का कार्य हो रहा है. प्रदर्शनी के उद्घाटन कार्यक्रम में मंच पर रिद्धपुर केंद्र की प्रभारी डॉ. नीता मेश्राम, पायलट परियोजना के समन्वयक डॉ. राजेश लेहकपुरे की उपस्थिति थी.
महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी में 12 वी शताब्दी की 36 हस्तलिखित पांडुलिपियाँ, वस्तुएं, ग्रंथ, रिद्धपुर के पुरातन विशेष स्थानों के चित्र (जिसमे राजमठ, सासु-सुन विहिर, लिला चरित्र ग्रंथ निर्मिती स्थान (वाजेश्वरी), भैरव बुरूज, दोन्ही देवा भेटी स्थान, राजमठ प्रवेश द्वार, मातंग विहीर तथा लिला) आदि साहित्य प्रदर्शित किया गया. साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा और हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद सम्मान-2026’ मिलने पर कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा का रिद्धपुर केंद्र द्वारा सम्मान किया गया . प्रदर्शनी को शिक्षक, विद्यार्थियों ने भेट देकर प्राचीन साहित्य की जानकारी प्राप्त की. पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु तैयार किए जा रहे डिजिटल पुस्तकालय का शुभारंभ तथा मराठी भाषा गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी पर आधारित शोध जर्नल का विमोचन कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के द्वारा किया गया. कार्यक्रम का प्रास्ताविक रिद्धपुर केंद्र की प्रभारी डॉ. नीता मेश्राम ने तथा अतिथियों का परिचय पायलट परियोजना के समन्वयक डॉ. राजेश लेहकपुरे ने किया. कार्यक्रम का संचालन सुमित वेलकर ने किया तथा कुनाल हरणे ने आभार ज्ञापित किया.
इस अवसर पर रिद्धपुर केंद्र पर कार्यरत सहायक महेश राठोड, एमटीएस भूषण शिरभाते, सुरक्षा कर्मी रवीन्द्र ठाकरे, सफाईकर्मी निखिल गजभिये सहित आकाश गजभिये, सुमित वेलकर, उज्ज्वल गेदाम, पूजा हरणे, मनीषकुमार शेंडे, कांचन श्रीराव, मोनिका श्रीराव, आस्था कांबले, अभिजीत पडोले, रामेश्वर नागोसे, प्रवीण गजभिये, सीमा पंजाबी, विद्या इल्लेकर, अंकिता देशमुख, योगेश पाटिल, सिद्धेस्वर काले, विशाल हिवरखेडकर, डॉ. स्वप्निल मून, डॉ. नितिन रामटेके, डॉ. मनोज मुनेश्वर, श्रेयश कोल्हेकर, अजय पटोले आदि की उपस्थित थी .

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