अब महाराष्ट्र में 48 की बजाए 72 सांसद तथा 288 की बजाए 432 विधायक होंगे!

नए परिसीमन के लागू होने के बाद लोकसभा व विधानसभा में बढेगी सदस्य संख्या

अमरावती/नई दिल्ली/दि.15 – इस समय लोकसभा हेतु महाराष्ट्र से 48 सांसद चुने जाते है. साथ ही राज्य की विधानसभा के लिए 288 विधायकों का निर्वाचन होता है. परंतु अब जल्द ही लोकसभा व विधानसभा की सदस्य संख्या में बढोतरी होती दिखाई देगी, जिसके बाद महाराष्ट्र से 72 सांसद व 432 विधायक चुने जा सकते है. क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा जहां एक ओर सन 2029 से पहले संसद सहित राज्य विधानसभाओं में महिलाओं हेतु 33 फीसद आरक्षण विधेयक को लागू करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है. जिसके लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत करते हुए जरुरत महसूस होने पर जारी संसदीय सत्र में एक संविधान संशोधन विधेयक भी पेश किया जाएगा. वहीं दूसरी ओर इसके बाद संसदीय एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होने की भी संभावना है. क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक के अलावा केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन आयोग गठित करने हेतु एक दूसरे विधेयक पर भी काम किया जा रहा है.
बता दें कि, इस समय केंद्र सरकार लोकसभा सीटों के विस्तार और महिला आरक्षण 2029 से पहले लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत परिसीमन आयोग के जरिए सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. मिली जानकारी के अनुसार, इन मुद्दे पर फिलहाल विचार विमर्श जारी है. वहीं इस प्रक्रिया के बाद लोकसभा की सीटें लगभग दोगुनी होने की संभावना है. कई राज्यों समेत महाराष्ट्र की सीटों में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है, अब सवाल ये है कि कितनी सीटें बढ़ सकती है.
सूत्रों के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. इसमें एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने की योजना है. इस प्रस्ताव का सीधा असर महाराष्ट्र पर भी देखने को मिल सकता है. मौजूदा समय में राज्य में 48 लोकसभा सीटें हैं, जो परिसीमन के बाद बढ़कर 72 हो सकती हैं. यानी राज्य में कुल 24 नई सीटों का इजाफा संभव है.         * अमरावती जिले से चुने जाएंगे 2 सांसद व 12 विधायक
– परिसीमन के बाद नए निर्वाचन क्षेत्रों का होगा गठन
यदि संसदीय एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होता है, तो अमरावती व वर्धा संसदीय क्षेत्रों को नए सिरे से परिसीमित करते हुए एक नया निर्वाचन क्षेत्र गठित किया जाएगा. जिसके चलते अमरावती व वर्धा संसदीय क्षेत्र से 2 की बजाए 3 सांसद चुने जाएंगे. इसी तरह अमरावती जिले के 8 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन करते हुए 12 विधानसभा क्षेत्र बनाए जाएंगे और जिले से 8 की बजाए 12 विधायक चुने जाएंगे, यानि नए परिसीमन के बाद लोकसभा व विधानसभा की सदस्य संख्या में सीधे डेढ गुना वृद्धि होने जा रही है.
ऐसे में इस समय इस बात को लेकर जबरदस्त उत्सुकता देखी जा रही है कि, नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आनेवाला संसदीय क्षेत्र कौनसा रहेगा और उसमें किन-किन क्षेत्रों का समावेश रहेगा. साथ ही इस समय अमरावती व वर्धा संसदीय क्षेत्र में शामिल रहनेवाले किन-किन विधानसभा क्षेत्रों को नए परिसीमन के बाद नए संसदीय क्षेत्र में शामिल किया जाएगा, कुछ इसी तरह की उत्सुकता विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी है. इस समय अमरावती जिले में कुल 8 विधानसभा क्षेत्र है. जिनका नए सिरे से परिसीमन करते हुए 12 विधानसभा क्षेत्र बनाए जाने की संभावना है. जिसके चलते इस बात को लेकर भी उत्सुकता देखी जा रही है कि, अमरावती जिले के मौजूदा 8 विधानसभा क्षेत्रों का किस तरह से विभाजन करते हुए नए निर्वाचन क्षेत्रों का गठन व निर्माण किया जाता है और 12 नए निर्वाचन क्षेत्र कौन-कौनसे रहते है                                                                                                                        * अमरावती * जिले पर पडनेवाले प्रभाव की प्रकाशित होगी विस्तृत श्रृंखला
निर्वाचन क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन का अमरावती जिले के संसदीय एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र सहित जिले के राजनेताओं और उनकी राजनीति का किस तरह से असर पड सकता है. साथ ही साथ परिसीमन के चलते अमरावती जिले में राजनीतिक स्थितियां किस तरह से प्रभावित हो सकती है, इसे लेकर दैनिक ‘अमरावती मंडल’ द्वारा अगले कुछ दिनों तक रोजाना विधानसभा क्षेत्रनिहाय खबरों का सिलसिलेवार प्रकाशन किया जाएगा. जिसमें संसदीय क्षेत्र के नए परिसीमन सहित 8 विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन पश्चात संभावित विभाजन तथा 12 विधानसभा क्षेत्रों के अनुमानित गठन के साथ ही इसकी वजह से मौजूदा सांसद सहित विधायकों की प्रभावित होनेवाली राजनीति के बारे में विमर्श प्रस्तुत किया जाएगा. साथ ही साथ इस जरिए मौजूदा सांसद व विधायकों सहित संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के कद्दावर राजनीतिज्ञों से बातचीत करते हुए उनके विचार भी प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा
* महाराष्ट्र में पहले 45 संसदीय क्षेत्र थे, सन 1976 के चुनाव में बढकर 48 हुए थे
बता दें कि, महाराष्ट्र में लोकसभा सीटों की संख्या समय के साथ बदलती आई है. देश के सबसे पहले लोकसभा चुनाव के बारे में बात करें, जो कि 1952 में हुई थी, तब, महाराष्ट्र (तब बंबई नाम से जाना जाता था) राज्य में कुल 45 सीटें थीं. वहीं 1976 की परिसीमन समिति के बाद 1977 के चुनाव में यह संख्या बढ़कर 48 हो गई, जो अभी तक कायम है.बॉक्स
* महाराष्ट्र की मौजूदा 48 लोकसभा सीटों के नाम
सूची 13 के तहत महाराष्ट्र के संसदीय क्षेत्रों में अमरावती, वर्धा, यवतमाल-वाशिम, अकोला, बुलढाणा, नागपुर, रामटेक, चंद्रपुर, चिमूर, गढचिरोली, गोंदिया-भंडारा, राजापुर, रत्नागिरी, कोलाबा, मुंबई दक्षिण, मुंबई दक्षिण-मध्य, मुंबई उत्तर मध्य, मुंबई उत्तर पूर्व, मुंबई उत्तर पश्चिम, मुंबई उत्तर, ठाणे, डहाणू, नासिक, मालेगांव, धुलिया, नंदुरबार, एरंडोल, जलगांव, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, जालना, औरंगाबाद, भिर, लातूर उस्मानाबाद, सोलापुर, पंढरपुर, अहमदनगर, खेड़, पुणे, बारामती, सातारा, कराड, सांगली, इचलकरंजी और कोल्हापुर आदि संसदीय क्षेत्रों में शामिल हैं.
* देशभर में संभावित बदलाव, उत्तरी राज्यों को होगा फायदा
सूत्रों के मुताबिक नए प्रस्ताव में सीटों की संख्या करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है. इसका सबसे ज्यादा फायदा उत्तर भारत के बड़े राज्यों को मिल सकता है. उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 तक हो सकती हैं.
* दक्षिणी राज्य कर रहे परिसीमन का विरोध
वहीं दूसरी ओर तमिलनाडू सहित दक्षिणी भारत के कुछ राज्यों द्वारा प्रस्तावित परिसीमन का विरोध किया जा रहा है. इन दक्षिणी राज्यों का कहना है कि, यदि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या तय की जाती है, तो इसका दक्षिणी राज्यों को नुकसान उठाना पडेगा. क्योंकि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू किया है. जिसके चलते उत्तरी राज्यों की तुलना में दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या कम है. वहीं निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन हेतु जनसंख्या को ही आधार बनाया गया है. यह एक तरह से अच्छे काम के लिए दंडीत करने की तरह होगा. क्योंकि उत्तरी भारत के राज्यों में जनसंख्या तेजी के साथ बढी है. ऐसे में परिसीमन का उन राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर लाभ होगा.
* परिसीमन और जनगणना का कनेक्शन
अनुमान है कि अगली जनगणना 1 मार्च 2027 तक पूरी हो सकती है. इसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा और प्रक्रिया पूरी होने में करीब 3 साल लग सकते हैं. ऐसे में यदि कानून में बदलाव नहीं हुआ तो यह प्रक्रिया 2029 चुनाव के बाद भी लागू हो सकती है. सूत्रों के अनुसार सरकार इस प्रक्रिया में देरी से बचने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बना सकती है. हालांकि विपक्ष ने जनगणना और परिसीमन को जोड़ने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इससे महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती
* देश में इससे पहले भी चार बार हो चुका परिसीमन
– बता दें कि, भारत में अब तक चार बार परिसीमन हुआ है. जिसमें सन 1952, सन 1963, सन 1973 व सन 2002 में परिसीमन किया गया. सन 1976 तक प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा, राज्यसभा एवं विविध राज्यों के विधानसभाओं की सदस्य संख्या नए सिरे से तय की जाती थी.
– सन 1976 में तत्कालीन ने सीटों के आवंटन को इस वजह के चलते फ्रीज कर दिया था कि, देश में परिवार नियोजन के नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू करनेवाले राज्यों को प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर कोई नुकसान न हो.
– इस फैसले को संविधान में किए गए 42 वें संशोधन के जरिए लागू किया गया था. इस संशोधन ने सन 2001 की जनगणना तक संसद सहित विधानसभाओं की सीटों में किसी भी तरह के बदलाव पर रोक लगा दी थी.
– सन 2001 में संसदीय एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की गई थी. लेकिन सीटों की कुल संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया था.
* परिसीमन के बाद किस राज्य से होंगे कितने सांसद
राज्य मौजूदा संख्या     परिसीमन के बाद
उत्तर प्रदेश           80      120
महाराष्ट्र               48       72
पश्चिम बंगाल        42       63
बिहार                40       60
तमिलनाडू          39      59
कर्नाटक            28      42
गुजरात             26      39
राजस्थान           25      38
आंध्र प्रदेश         25      38
ओडिशा            21      32
केरलम             20      30
तेलंगना            17      26
मध्य प्रदेश        14      21
झारखंड           14      21
असम              14      21
पंजाब              13      20
छत्तीसगढ        11      17
हरियाणा          10      15
दिल्ली              07      11
जम्मू-कश्मीर     05     08
उत्तराखंड          05      08
हिमाचल प्रदेश   04      06
गोवा                02      03
मेघालय            02      03
मणिपुर             02     03
अरुणाचल प्रदेश 02      03
नागालैंड            01     02
मिझोरम             01     02
त्रिपुरा                01     02
सिक्कीम            01      02
दादर-नगर हवेली 01      01
लक्षद्वीप              01      01
चंदीगढ              01      01
पुड्डूचेरी            01      01
अंदमान-निकोबार 01     01
दमन-दीव            01     01
लदाख                 01    01

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