हाईकोर्ट ने कायम रखी उम्रकैद की सजा
रिसोड के पत्नी हंता को राहत नहीं

* गला घोंटकर मार डाला था पत्नी को
नागपुर/दि.7- वाशिम जिले के रिसोड तहसील अंतर्गत पत्नी हत्या के आरोपी धनंजय प्रल्हाद बोडखे को बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने तगडा झटका दिया. बोडखे की याचिका को खारिज कर उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्बारा बोडखे को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कायम रखा है. उस पर पत्नी सुनीता की 24 मई 2018 को हत्या करने का जुर्म साबित होने से आरोपी को 10 हजार रूपए जुर्माना भी वाशिम की कोर्ट ने 8 दिसंबर 2021 को दिए फैसले में सुनाई थी.
न्या. उर्मिला जोशी फाल्के और न्या. निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने परिस्थितिजन्य तथ्य के आधार पर आरोपी बोडखे की अपील को मेरिट योग्य नहीं माना. कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने पत्नी पर हमला किया. उसे गला घोंटकर मार डाला. फिर आत्महत्या दिखाने की कोशिश की गई. सुनीता बोडखे की मृत्य को दुर्घटना मानने से उच्च न्यायालय ने इंकार कर दिया. यह भी कहा कि दुर्घटना सिध्द करने का कोई सबूत नहीं है. सभी परिस्थितियां आरोपी को कसूरवार बता रही है.
धनंजय बोडखे और सुनीता का विवाह 2012 में हुआ था. सत्र न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्बारा आरोपी धनंजय को सुनीता की मौत का जिम्मेदार बताते हुए परिस्थितिजन्य सबूत और गवाह पेश किए गये. न्यायालय ने बोडखे को दोषी पाकर कडे कारावास की सजा सुनाई. वहीं दफा 498 की धारा से आरोपी को बरी कर दिया.
सत्र न्यायालय के फैसलें को आरोपी ने एड.एस. डी. चांदे के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी. किंतु कोर्ट ने कहा कि आरोपी अपनी पत्नी और तीन बेटियों के साथ हंसी खुशी जीवन बीता रहा था. ऐसे में घर में कोई अनहोनी घटना की पूरी जिम्मेदारी और उस बारे में खुलासा करने का भी दायित्व आरोपी का ही था. उसके बावजूद आरोपी ऐसा करने में असफल रहा. उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का उल्लेख भी किया. खंडपीठ ने कहा कि कोई दोषी व्यक्ति बगैर सजा पाए छूट न जाए, इसकी जिम्मेदारी न्यायाधीश की होती है. कोर्ट ने त्रिमुख कीरकान विरूध्द महाराष्ट्र शासन का प्रकरण का उदाहरण देकर कहा कि आरोपी ने भले ही प्लानिंग कर और सोच समझकर गुन्हा न किया हो. किंतु परिस्थितियों में की गई हत्या भी बडा अपराध मानी जायेगी.





