लावारिस लाशों को मिलेगी पहचान
सीआईडी की मानक कार्यप्रणाली लागू

* जांच में आधुनिक तकनीक का
नाशिक/दि.20 – अपराध अन्वेषण विभाग सीआईडी ने लावारिस लाशों की पहचान के लिए नई एसओपी तैयार की है. प्रदेश के पुलिस महासंचालक सदानंद दाते के आदेश पर यह एसओपी सभी पुलिस घटकों तक भेजी गई है. उसके तत्काल क्रियान्वयन के लिए कहा गया है. विविध कारणों से होनेवाली मैत के कारण अंजान शवों की पहचान अब सरल और वेगवान होने की संभावना बताई जा रही है.
* क्या है एसओपी?
स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर अर्थात एसओपी में घटनास्थल जांच से लेकर आधुनिक तकनीक के उपयोग तक सभी बातें शामिल की गई है. शव का छायाचित्रण, वीडियोग्राफी, शरीर के निशान, कपडे और पास की वस्तुओं की जानकारी दर्ज करना अनिवार्य किया गया है. उसी प्रकार अंगूली के निशान, डीएनए सैम्पल, दांत परिक्षण और हड्डीयों की जांच जैसे शास्त्रीय सबूतों के उपयोग पर विशेष बल नई कार्यप्रणाली में दिया गया है. इसके साथ ही सीसीटीएनएस, मिसिंग पर्सन ब्यूरो, आधार डेटा, वोटर लिस्ट संबंधी जानकारी की पडताल करने के निर्देश दिए गए हैं.
* कोई लावारिस न रहें
अपराध छुपाने के लिए कई बार मर्डर अथवा दुर्घटना कर शव निर्जन स्थल पर डाल दिया जाता है. नई कार्यप्रणाली से ऐसे लोगों का पता लगाना आसान होगा. एक भी मृतक बेवारस न रहें, और प्रत्येक लाश की पहचान कर उसे सम्मानपूर्वक परिजनों तक पहुंचाने का उद्देश्य एसओपी का रहने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी ने दी. उन्होंने बताया कि, नई कार्यप्रणाली के इस्तेमाल और क्रियान्वयन की कडी हिदायत सभी घटक पुलिस प्रमुखों को दी गई है. विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा. जांच बंधनकारक की गई है.





