शिक्षकों की मान्यता को बेवजह रद्द करना गैर कानूनी

हाईकोर्ट ने शिक्षा उप संचालक के आदेश को किया रद्द

नागपुर /दि.11- शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति को दी गई मान्यता कारण बताओं नोटिस जारी न करते हुए रद्द करना कानून के खिलाफ रहने का महत्वपूर्ण निर्णय नागपुर हाईकोर्ट द्बारा दिया गया. अदालत ने उप शिक्षा संचालक द्बारा मान्यता रद्द करने का आदेश खारिज करते हुए कोई भी प्रतिकुल कार्रवाई करने से पहले संबंधित कर्मचारी को कारण बताओं नोटिस जारी करना तथा संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य रहने की बात कही.
विविध शालाओं के शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर 11 याचिकाएं दायर की थी. जिन पर न्यायमूर्ति अनिल पानसरे व न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई. याचिका के अनुसार मान्यताा रद्द करने से पहले उन्हें कारण बताओं नोटिस जारी नहीं की गई और प्रभावी सुनवाई का कोई अवसर भी नहीं दिया गया. 23 अगस्त 2017 के शासन निर्णय का आधार लेते हुए तथा हाईकोर्ट द्बारा इससे पहले दिए गये फैसलों का आधार लेते हुए यह कार्रवाई की गई. संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओं नोटिस नहीं दी गई रहने की बात ध्यान में आते ही अदालत ने इसे प्राकृतिक न्याय के तत्वों का उल्लंघन बताया तथा शिक्षकों के निवेदन को मंजूर करते हुए उपशिक्षा संचालक के आदेश को रद्द कर दिया. साथ ही भविष्य में इस तरह के निर्णय लेते समय 23 अगस्त 2027 के शासन निर्णय सहित उच्च न्यायालय के पूर्ववर्ती आदेशों का कडाई के साथ पालन करने का निर्देश भी दिया.

* दो नोटिसों में काफी बडा पद
राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों को सुनवाई हेतु नोटिस जारी करने और उसके बाद ही आदेश देने का दावा किया था. परंतु अदालत ने इस युक्तिवाद को यह कहते हुए खारिज किया कि सुनवाई हेतु बुलाने की नोटिस तथा कारण बताओें नोटिस दो अलग-अलग प्रक्रिया है. नोटिस में आरोप अथवा कार्रवाई का आधार यदि स्पष्ट तौर पर दर्ज नहीं है तो उसे कारण बताओं नोटिस नहीं माना जा सकता है.

 

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