सौतेले बच्चों को सौतेले पिता से गुजारा भत्ता का अधिकार नहीं
नागपुर हाईकोर्ट का फैसला

नागपुर/दि.11- मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सौतेले बच्चों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत अपने सौतेले पिता से गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार नहीं है. न्यायमूर्ति एम. एम. नेरलीकर ने यवतमाल फैमिली कोर्ट द्वारा सौतेली बेटियों को गुजारा भत्ता देने के आदेश को रद्द कर दिया. हालांकि, अदालत ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने के आदेश को बरकरार रखा है. अदालत ने कहा कि पति कमाने वाला है और पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति पर आती है.
* क्या है पूरा मामला?
अकोला जिले के तेल्हारा निवासी राघव (काल्पनिक नाम) ने जुलाई 2022 में यवतमाल निवासी रजनी (काल्पनिक नाम) से शादी की थी. दोनों की यह दूसरी शादी थी और दोनों के पहले पति-पत्नी का निधन हो चुका था. रजनी के पहले पति से दो नाबालिग बेटियां थीं. शादी के कुछ महीने बाद पारिवारिक विवाद के चलते राघव ने रजनी और उसकी दोनों बेटियों को घर से बाहर कर दिया. इसके बाद रजनी और उसकी दोनों बेटियों ने यवतमाल फैमिली कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता देने की मांग की.
* फैमिली कोर्ट ने दिया था 1,500 रुपये प्रतिमाह
मई 2025 में फैमिली कोर्ट ने रजनी और उसकी दोनों बेटियों को प्रत्येक को 1,500 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था. इस आदेश को राघव ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में चुनौती दी. मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने धारा 125 में प्रयुक्त कानूनी प्रावधानों और ‘बच्चे’ की परिभाषा पर विचार किया.
* सौतेली बेटियों को नहीं मिलेगा धारा 125 का लाभ
हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 125 में ‘वैध या अवैध बच्चे’ से संबंधित प्रावधान का उद्देश्य उस बच्चे के भरण-पोषण से है, जिसका संबंधित व्यक्ति के साथ कानूनी/जैविक पितृत्व संबंध हो. अदालत ने कहा कि कानून की भाषा को अपने स्तर पर बदलकर सौतेले बच्चों को भी इस प्रावधान के दायरे में शामिल नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 125 सामाजिक कल्याण और जरूरतमंदों को राहत देने वाला प्रावधान है, लेकिन अदालत कानून में ऐसे शब्द नहीं जोड़ सकती जो विधायिका ने शामिल नहीं किए हैं.
* पत्नी को गुजारा भत्ता देना जरूरी
हाईकोर्ट ने रजनी को गुजारा भत्ता देने के आदेश को बरकरार रखा. अदालत ने कहा कि पति कमाने की स्थिति में है और पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से वह केवल इस आधार पर बच नहीं सकता कि दोनों की शादी दूसरी थी.
* कानून में बदलाव का अधिकार संसद को
अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में सौतेले बच्चों को भी ऐसे मामलों में गुजारा भत्ता देने का अधिकार प्रदान करना है, तो इसके लिए कानून में आवश्यक संशोधन करना संसद का अधिकार है. न्यायालय कानून के स्पष्ट शब्दों को अपनी ओर से बदलकर उसका दायरा नहीं बढ़ा सकता. इस फैसले के बाद यवतमाल फैमिली कोर्ट का सौतेली बेटियों को गुजारा भत्ता देने वाला आदेश रद्द कर दिया गया, जबकि पत्नी के गुजारा भत्ता संबंधी अधिकार को बरकरार रखा गया.




