काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करें

यवतमाल जिला परिषद मामले में हाईकोर्ट का आदेश

* 6 सितंबर तक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
नागपुर /दि.21- मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने यवतमाल जिला परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उनकी कानूनी जिम्मेदारियों में कथित लापरवाही के मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर 6 सितंबर तक उसकी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है. जिला परिषद के प्रशिक्षित स्नातक प्राथमिक शिक्षक सुनील कुमार काटोले ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका पर न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता के समक्ष सुनवाई हुई.
काटोले को 13 जनवरी 2010 को स्नातक प्राथमिक शिक्षक के पद पर पदोन्नति दी गई थी. नियमों के अनुसार छह वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वह केंद्र प्रमुख के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हैं. इसी आधार पर उन्होंने स्नातक प्राथमिक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में अपना नाम शामिल करने की मांग की थी. इस संबंध में उन्होंने 20 अगस्त 2025 को प्राथमिक शिक्षा अधिकारी, यवतमाल, 25 सितंबर 2025 को अमरावती विभागीय आयुक्त और 3 अक्टूबर 2025 को यवतमाल जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन दिए थे.
* आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
अमरावती विभागीय आयुक्त ने 8 अक्टूबर 2025 को यवतमाल जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को मामले पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे. हालांकि, कटोले का आरोप है कि काफी समय बीतने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने उनके मामले में कोई निर्णय नहीं लिया. मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों की ओर से कथित देरी और लापरवाही को गंभीरता से लिया. अदालत ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा उसकी रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में पेश करने के निर्देश दिए.
* प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त रुख
अदालत ने सरकारी अधिकारियों द्वारा अपने कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करने को गंभीरता से लिया. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

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