साढ़े पांच साल में 3.63 लाख पेड़ों की अवैध कटाई, 32 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान
महाराष्ट्र की वनसंपदा पर तस्करों का हमला

* चंद्रपुर और गड़चिरोली में सागौन तस्करों का बोलबाला, वन विभाग के सामने संरक्षण की बड़ी चुनौती
नागपुर /दि.29- महाराष्ट्र की हरित संपदा पर अवैध वृक्ष कटाई का गंभीर खतरा मंडरा रहा है. वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से मार्च 2026 तक के साढ़े पांच वर्षों में राज्यभर में 3 लाख 63 हजार 342 पेड़ों की अवैध कटाई की गई है. इनमें 1 लाख 34 हजार 675 मूल्यवान सागौन (सागवान) के पेड़ शामिल हैं. इस बड़े पैमाने पर हुई अवैध कटाई के कारण राज्य को 32 करोड़ 84 लाख 57 हजार रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है. वन विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल आर्थिक क्षति नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और जलवायु संरक्षण के लिए भी गंभीर खतरे का संकेत है.
* अनुमति प्रणाली का हो रहा दुरुपयोग
महाराष्ट्र वृक्ष कटाई (विनियमन) अधिनियम, 1964 तथा उससे संबंधित नियमों के तहत कृषि भूमि और निजी क्षेत्रों में पेड़ काटने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना आवश्यक है. हर वर्ष हजारों आवेदन प्राप्त होते हैं और जांच के बाद नियमों के अनुरूप अनुमति प्रदान की जाती है. हालांकि, वन विभाग के अनुसार कुछ लोग इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं. अनुमति प्राप्त कटाई की आड़ में या बिना किसी अनुमति के आरक्षित वन क्षेत्रों में घुसकर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है. यही कारण है कि अवैध वृक्षतोड़ पर नियंत्रण वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
* वर्षवार सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अवैध रूप से काटे गए पेड़ों और हुए नुकसान का विवरण इस प्रकार है-
वर्ष अवैध रूप से काटे गए पेड़ सागौन के पेड़ अनुमानित नुकसान
2021 81,086 31,310 6.80 करोड़ रुपये
2022 65,650 25,627 5.96 करोड़ रुपये
2023 68,077 25,379 6.89 करोड़ रुपये
2024 68,366 26,674 5.77 करोड़ रुपये
2025 63,049 19,911 5.77 करोड़ रुपये
2026 (मार्च तक) 17,114 5,774 1.62 करोड़ रुपये
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हर वर्ष हजारों पेड़ अवैध कटाई की भेंट चढ़ रहे हैं और नुकसान का आंकड़ा लगातार करोड़ों रुपये में पहुंच रहा है.
* तस्करों के निशाने पर सागौन
राज्य में अवैध रूप से काटे गए कुल पेड़ों में 37 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सागौन का है. सागौन की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में ऊंची कीमत होने के कारण यह लकड़ी तस्करों की पहली पसंद बनी हुई है. वन विभाग के अनुसार चंद्रपुर, गड़चिरोली, नागपुर, अमरावती और ठाणे वनवृत्तों में हाल के वर्षों में सागौन की अवैध कटाई और तस्करी के कई बड़े मामले सामने आए हैं. विशेष रूप से गड़चिरोली और चंद्रपुर के घने वन क्षेत्रों में सक्रिय गिरोह व्यवस्थित तरीके से पेड़ों की कटाई कर लकड़ी को अन्य राज्यों तक पहुंचा रहे हैं.
* अंतरराज्यीय तस्करी का जाल सक्रिय
जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में अंतरराज्यीय तस्कर गिरोह सक्रिय हैं, जो स्थानीय नेटवर्क की मदद से जंगलों से लकड़ी निकालकर बड़े बाजारों तक पहुंचाते हैं. इन गिरोहों के पास परिवहन, भंडारण और बिक्री की संगठित व्यवस्था होने के कारण कार्रवाई के बावजूद अवैध कारोबार पूरी तरह नहीं रुक पा रहा है. वन अधिकारियों का कहना है कि तस्करों द्वारा आधुनिक तकनीकों और नए रास्तों का इस्तेमाल किए जाने से निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है.
* पर्यावरण पर पड़ रहा गंभीर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर वृक्ष कटाई से केवल वन क्षेत्र ही प्रभावित नहीं हो रहा, बल्कि इसका असर वर्षा चक्र, भूजल स्तर, वन्यजीवों के आवास और जैव विविधता पर भी पड़ रहा है. सागौन जैसे दीर्घकालिक वृक्षों को विकसित होने में कई दशक लगते हैं, जबकि उनकी कटाई कुछ घंटों में कर दी जाती है. वन क्षेत्रों में घटती हरियाली का असर स्थानीय आदिवासी समुदायों और वन पर निर्भर ग्रामीणों की आजीविका पर भी पड़ रहा है.
* वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती
राज्य में लगातार बढ़ रही अवैध वृक्ष कटाई ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है. विभाग का कहना है कि निगरानी बढ़ाने, संयुक्त अभियान चलाने, आधुनिक तकनीक का उपयोग करने और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. हालांकि, जब तक तस्करी के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जाता, तब तक राज्य की वनसंपदा को सुरक्षित रखना आसान नहीं होगा.
महाराष्ट्र की हरित विरासत को बचाने के लिए अब केवल सरकारी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जनसहभागिता, कड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जागरूकता की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है.





