दिवाली सिर पर, सरकारी धान खरीदी केंद्रों का अता-पता नहीं!
जिला मार्केटिंग फेडरेशन का 2.50 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य

समर्थन मूल्य का लाभ पाने के लिए किसानों को इंतजार
निजी व्यापारियों को कम दाम पर धान बेचने की मजबूरी
नागपुर /दि. 15- दिवाली नजदीक आ गई है और बाजार में हल्के धान की बिक्री भी शुरू हो गई है. इसके बावजूद सरकारी धान खरीदी केंद्र अब तक शुरू नहीं हुए हैं. शासन के आदेश जारी नहीं होने से समर्थन मूल्य पर धान बेचने की प्रतीक्षा कर रहे किसानों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं. त्योहार के खर्च पूरे करने के लिए किसानों को निजी व्यापारियों के हाथों कम कीमत पर धान बेचने की नौबत आ रही है.
ज्ञात रहे कि, पूर्व विदर्भ के नागपुर, भंडारा, गोंदिया, गड़चिरोली और चंद्रपुर इन पांच जिलों में धान प्रमुख फसल है. खरीफ मौसम के धान की सरकारी खरीदी के आदेश अब तक जारी नहीं होने से किसानों के सामने अपनी उपज बेचने का सवाल खड़ा हो गया है. खेतों में तैयार फसल बाजार में पहुंचने लगी है, लेकिन सरकारी खरीदी व्यवस्था शुरू नहीं होने से किसानों को उचित मूल्य मिलने में देरी हो रही है.
नागपुर जिला मार्केटिंग फेडरेशन से मिली जानकारी के अनुसार, खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में जिले में लगभग 2.50 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य अपेक्षित है. पिछले खरीफ मौसम में करीब 135 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी. इस वर्ष धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है. हालांकि, खरीदी केंद्र शुरू नहीं होने से किसान इस दर का लाभ लेने के लिए इंतजार कर रहे हैं.
सरकारी केंद्रों पर धान बेचने के लिए किसानों को एनईएमएल पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना आवश्यक है. बताया जा रहा है कि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं और शासन के आदेशों के अभाव में खरीदी प्रक्रिया अटकी हुई है. ऐसे में केंद्र कब शुरू होंगे और किसानों की उपज की खरीदी कब होगी, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
* दिवाली के खर्च कैसे पूरे करें किसान?
दिवाली जैसे बड़े त्योहार के ठीक पहले खरीदी केंद्र शुरू नहीं होने से आर्थिक जरूरतों का सामना कर रहे किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेती की उपज बेचकर त्योहार के खर्च पूरे करने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को अब निजी व्यापारियों के पास जाना पड़ रहा है. इससे उन्हें घोषित समर्थन मूल्य की तुलना में कम दर मिलने का खतरा है. रामटेक तहसील के शिवणी-भोंडकी गांव के एक किसान ने मांग की है कि शासन तत्काल खरीदी के आदेश जारी करे, ऑनलाइन पंजीयन में आ रही तकनीकी समस्याओं को दूर करे और किसानों को बोनस की राशि भी अदा करे. किसान का कहना है कि समय पर सरकारी खरीदी शुरू नहीं होने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ रही है.
* पिछले वर्ष के धान बोनस का भी इंतजार
सरकारी खरीदी केंद्र समय पर शुरू नहीं होने के कारण किसानों को अक्सर निजी व्यापारियों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ता है. इस परेशानी के साथ ही वर्ष 2025-26 का धान बोनस भी अब तक नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
महाराष्ट्र शेतकरी संगठन के प्रदेशाध्यक्ष भूषण कुंटे ने शासन से मांग की है कि धान खरीदी की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और लंबित बोनस का वितरण भी शीघ्र किया जाए. किसानों को त्योहार के समय आर्थिक संकट से बचाने के लिए खरीदी केंद्रों का जल्द संचालन और पंजीयन संबंधी समस्याओं का निराकरण जरूरी है.





