प्रेमी के लिए पतियों की हत्या के मामले बढ़े

अफेयर की आड़ में खून का खेल!

नागपुर/दि.21– पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास, निष्ठा और पारिवारिक मूल्यों पर टिका माना जाता है. लेकिन विवाहेतर संबंधों के चलते इसी रिश्ते में दरार पड़ने के साथ कई मामलों में बात हत्या तक पहुंच रही है. महाराष्ट्र में हाल के दिनों में सामने आए कुछ मामलों ने इस गंभीर प्रवृत्ति को उजागर किया है. विवाहेतर संबंधों में बाधा बन रहे पति को रास्ते से हटाने के लिए पत्नी और उसके प्रेमी द्वारा हत्या की साजिश रचने के मामले सामने आए हैं.
हाल ही में 19 अगस्त 2026 को वर्धा जिले के शेकापूर में एक महिला पर अपने पति संतोष केकाले की हत्या का आरोप लगा. पुलिस के अनुसार, सपना केकाले के पति के चचेरे भाई के साथ कथित संबंध थे. आरोप है कि इन संबंधों में पति के बाधा बनने के चलते उसकी गला घोंटकर हत्या की गई और शव कुएं में फेंक दिया गया.
इससे पहले 9 अगस्त 2026 को नागपुर के एमआईडीसी क्षेत्र में 22 वर्षीय पूजा पर अपने पति सुधीर की हत्या का आरोप लगा था. बताया गया कि पहले पति को शराब पिलाई गई और इसके बाद दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस ने मामले की जांच के दौरान विवाहेतर संबंधों के पहलू को भी जांच में शामिल किया.
वहीं, 1 अप्रैल 2025 को पुणे के लोणी कालभोर में शोभा कालभोर पर प्रेमी गोरख कालभोर की मदद से पति रवींद्र कालभोर की हत्या करने का आरोप लगा था. आरोप के मुताबिक, पति के सोते समय उसके सिर पर फावड़े से वार किया गया. 9 नवंबर 2023 को पुणे के कोंढवा इलाके में भी विवाहेतर संबंधों को लेकर पति की हत्या का मामला सामने आया था. इस मामले में एक विवाहित महिला पर प्रेमी की मदद से पति की गला घोंटकर हत्या करने का आरोप लगा था.
* किन वजहों से बढ़ रहा है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच संवाद की कमी, रिश्तों में बढ़ता तनाव, सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले नए संबंध और पारिवारिक एवं नैतिक मूल्यों में कमी जैसी परिस्थितियां विवाद को गंभीर रूप दे सकती हैं. हालांकि, हर विवाहेतर संबंध अपराध में बदलता नहीं है और किसी घटना के वास्तविक कारण पुलिस जांच व न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होते हैं.
* संवाद की कमी बन रही बड़ी वजह
पति-पत्नी के बीच बातचीत और विश्वास की कमी होने पर छोटी-छोटी समस्याएं भी गंभीर विवाद का रूप ले सकती हैं. ऐसे में परिवार और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि रिश्तों में तनाव की स्थिति में हिंसा का रास्ता अपनाने के बजाय संवाद और कानूनी सहायता का सहारा लिया जाना चाहिए. महाराष्ट्र में सामने आए इन मामलों ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि आखिर रिश्तों में पैदा होने वाला अविश्वास कब और कैसे हिंसा में बदल जाता है. ऐसे मामलों में पुलिस जांच के साथ-साथ पारिवारिक स्तर पर जागरूकता और रिश्तों में संवाद बढ़ाने की आवश्यकता भी सामने आती है.

 

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