31.77 लाख रुपये के राशन घोटाले में महिला आपूर्ति निरीक्षक निलंबित
फर्जी राशन कार्ड, अतिरिक्त अनाज आवंटन और नियमों के उल्लंघन का आरोप; जिलाधिकारी ने की कार्रवाई

वर्धा /दि.14- वर्धा तहसील कार्यालय में पदस्थ आपूर्ति निरीक्षक मनीषा मांजरखेड़े को 31 लाख 77 हजार रुपये के कथित राशन घोटाले के मामले में निलंबित कर दिया गया है. जिला प्रशासन की जांच में अतिरिक्त अनाज आवंटन, नियमविरुद्ध राशन कार्ड स्वीकृत करने, सरकारी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने तथा महाराष्ट्र सिविल सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आने के बाद जिलाधिकारी वान्मथी सी. ने यह कार्रवाई की है.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह मामला वर्धा तहसील क्षेत्र के एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान से जुड़ा है, जहां अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी. जांच रिपोर्ट में कई गंभीर गड़बड़ियां उजागर होने के बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.
जानकारी के अनुसार, वर्धा के राशन दुकानदार डी. बी. कुंभलवार के दुकान संचालन को लेकर शासन को शिकायत प्राप्त हुई थी. इसके बाद तहसीलदार द्वारा 20 फरवरी 2026 को विस्तृत जांच की गई. जांच रिपोर्ट में पाया गया कि आपूर्ति निरीक्षक मनीषा मांजरखेड़े ने अपने आधिकारिक लॉगिन आईडी का उपयोग कर कथित रूप से नियमों के विपरीत कई राशन कार्ड मंजूर किए.
जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में तथाकथित ‘सायलेंट राशन कार्ड’ स्वीकृत किए गए, जिनमें कई लाभार्थियों के अस्तित्व और पात्रता पर सवाल खड़े हुए. 619 आवेदनों की जांच में से 337 आवेदनों का सत्यापन किया गया, जिसमें 25 लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने राशन कार्ड के लिए कोई आवेदन ही नहीं किया था. वहीं 126 आवेदनों के साथ निवास प्रमाण जैसे आवश्यक दस्तावेज भी संलग्न नहीं पाए गए.
जांच रिपोर्ट के अनुसार, कथित अनियमितताओं के कारण संबंधित राशन दुकान को जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच आवश्यकता से अधिक मात्रा में गेहूं, चावल और ज्वार का आवंटन किया गया. जब अधिकारियों ने दुकान का भौतिक निरीक्षण किया, तब रिकॉर्ड के अनुसार उपलब्ध होना चाहिए था उतना अनाज वहां मौजूद नहीं मिला.
प्रशासन का अनुमान है कि इस कथित अनियमितता से शासन को 31 लाख 77 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ. जांच में यह भी सामने आया कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के एक व्यक्ति को बिक्री प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दी गई, जिसे नियमों के विरुद्ध माना गया है.
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने 27 मार्च 2026 को मनीषा मांजरखेड़े को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. उनसे विभिन्न आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था. हालांकि, प्रशासन ने उनके जवाब को असंतोषजनक और तथ्यों के अनुरूप नहीं माना. जांच अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी नियमों, विभागीय निर्देशों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है. इसके आधार पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (शिस्त एवं अपील) नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.
जिला प्रशासन ने निलंबन प्रस्ताव को आगे की मंजूरी के लिए अन्न एवं नागरी आपूर्ति विभाग के सचिव के पास भेज दिया है. विभागीय सूत्रों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी रहेगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
सूत्रों के अनुसार, मनीषा मांजरखेड़े के खिलाफ लाभार्थियों तथा राशन दुकानदारों की ओर से पूर्व में भी कई शिकायतें की गई थीं. राशन वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. वर्तमान कार्रवाई को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.