माँ की आंखों में खुशी के आंसू, बेटे ने खाकी को किया सलाम

‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत लापता 13 वर्षीय बालक सकुशल मां की गोद में पहुंचा

अकोला /दि.21– अकोला रेलवे स्टेशन के बुकिंग परिसर से अचानक लापता हुए 13 वर्षीय बालक को रेलवे पुलिस ने तत्परता और सतर्कता से कुछ ही समय में सकुशल बरामद कर उसकी मां के सुपुर्द कर दिया. इस भावुक घटनाक्रम में एक ऑटो चालक की मानवीय संवेदनशीलता भी अहम साबित हुई.
जानकारी के मुताबिक बुलढाणा जिले के मलकापुर तहसील के झाड़ेगांव निवासी मंदाबाई अजबसिंग डाबेराव अपने 13 वर्षीय बेटे के साथ अकोला से मलकापुर जाने के लिए जनरल टिकट लेने अकोला रेलवे स्टेशन पहुंची थीं. टिकट लेने के दौरान उनका बेटा अचानक उनकी नजरों से ओझल हो गया. काफी तलाश के बावजूद जब वह नहीं मिला तो घबराई मां ने तत्काल जीआरपी पुलिस को सूचना दी. जानकारी मिलते ही महिला पुलिस अधिकारी सपोनि गीतांजली होरे अपने दल के साथ स्टेशन पहुंचीं. पुलिस ने बालक की हुलिया संबंधी जानकारी हासिल कर बुकिंग परिसर और स्टेशन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया. साथ ही ऑटो चालकों, कुलियों और वेंडरों से भी पूछताछ की गई.
इसी दौरान ऑटो चालक शोएब रहमान सलीम रहमान निवासी अकोला को स्टेशन के ऑटो स्टैंड के पास एक अकेला नाबालिग बालक दिखाई दिया. बालक के अकेले होने की बात समझते हुए ऑटो चालक ने सूझबूझ का परिचय दिया और उसे सुरक्षित जीआरपी अकोला थाने लाकर पुलिस के हवाले कर दिया. बालक के सुरक्षित मिलने की सूचना पुलिस ने उसकी मां को दी. पुलिस दल मां को लेकर थाने पहुंचा. बेटे को सकुशल सामने देखते ही मां भावुक हो उठी और उसकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. वहीं मां को देखते ही बालक भी भावुक हो गया. कुछ देर के लिए बेटे के लापता होने से किस तरह उसकी चिंता बढ़ गई थी, यह मां ने पुलिस को बताया और अकोला रेलवे पुलिस का आभार व्यक्त किया.
* ‘मैं भी बड़ा होकर पुलिस बनूंगा’
इस भावुक मिलन के बाद बालक ने जीआरपी अकोला के प्रभारी पुलिस निरीक्षक अमोल दोंड को सैल्यूट किया और कहा, मुझे भी बड़ा होकर पुलिस बनना है. बालक के मन में पुलिस सेवा के प्रति सम्मान और पुलिस अधिकारी बनने का सपना जागना इस पूरे अभियान का खास और भावुक क्षण रहा. बालक को सुरक्षित उसकी मां तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ऑटो चालक शोएब रहमान सलीम रहमान का अकोला रेलवे पुलिस की ओर से सत्कार किया गया. पुलिस की तत्परता, ऑटो चालक की सतर्कता और मानवीय संवेदना के कारण एक मां को उसका बेटा सुरक्षित वापस मिल सका. इस पूरे घटनाक्रम ने मराठी फिल्म ‘माझा छकुला’ और उसमें इंस्पेक्टर महेश जाधव की भूमिका की याद भी ताजा कर दी.

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